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सफला एकादशी: क्यों मनाई जाती है? जानिए कथा

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एकादशी के दिन भगवान विष्णु का विशेष आधिपत्य माना जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, भगवान विष्णु इस सृष्टि के पालनहार हैं। शास्त्रों के अनुसार, जो श्रद्धा से एकादशी का व्रत करता है, उसे पृथ्वी के सभी पवित्र तीर्थों की यात्रा के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

पद्म पुराण में एकादशी का वर्णन

पद्म पुराण में बताया गया है कि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी में कोई भेद नहीं करना चाहिए। दोनों ही एकादशियां समान रूप से फलदायी और महत्वपूर्ण मानी गई हैं। सफला एकादशी वर्ष की अंतिम एकादशी होती है, इसलिए इसका विशेष महत्व बताया गया है।

सफला एकादशी क्यों है विशेष

“सफला” शब्द का अर्थ है — सफलता प्रदान करने वाली। मान्यता है कि यह एकादशी भक्तों को उनके लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता करती है और जीवन की बाधाओं को दूर करती है। इस दिन व्रत और उपवास करना अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है।

व्रत का आध्यात्मिक लाभ

सफला एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। जो श्रद्धालु इस दिन पूरी भक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करते हैं, उन्हें जीवन में सुख, सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है।

सफला एकादशी पर क्या करें

इस पावन दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इसलिए सफला एकादशी को श्रद्धा, नियम और भक्ति भाव से मनाना अत्यंत फलदायी माना गया है।

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