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संजय के बयान से उठे सवाल, क्या फिर साथ आएंगे उद्धव और बीजेपी?”

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शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के बयान के बाद महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में दरारों की संभावना बढ़ गई है। राउत ने दावा किया कि भाजपा में कई लोग दोनों दलों के एक साथ आने के पक्ष में हैं, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है।

चंद्रकांत पाटिल और उद्धव ठाकरे की मुलाकात

यह बयान हाल ही में एक शादी के कार्यक्रम के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और भाजपा के मंत्री चंद्रकांत पाटिल के बीच हुई मुलाकात के बाद आया। पाटिल ने कहा था कि उनके लिए उद्धव और भाजपा के बीच मिलने का यह एक स्वर्णिम क्षण होगा। राउत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंद्रकांत पाटिल शुरू से ही शिवसेना-भाजपा गठबंधन के समर्थक रहे हैं।

भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) के रिश्ते पर राउत की टिप्पणी

राउत ने आगे कहा कि भाजपा में अब नए लोग आए हैं जो 25 साल पुराने गठबंधन का महत्व नहीं समझते, जबकि चंद्रकांत पाटिल जैसे नेता अब भी उस गठबंधन की अहमियत समझते हैं। राउत ने यह भी बताया कि शिवसेना (यूबीटी) ने नरेंद्र मोदी के साथ भी अच्छे संबंध बनाए थे, जब पार्टी एकजुट थी।

शिंदे गुट और भाजपा गठबंधन पर संजय राउत की भविष्यवाणी

राउत ने यह भी दावा किया कि एकनाथ शिंदे गुट का भाजपा के साथ गठबंधन लंबा नहीं चलेगा। उनका मानना है कि शिंदे गुट भी टूट जाएगा, जैसे कि शिवसेना (यूबीटी) का गुट टूटा था।

उद्धव के फैसले का समर्थन

भास्कर जाधव और विनायक राउत जैसे कई शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने कहा कि जो भी निर्णय उद्धव ठाकरे लेंगे, वे उसके साथ जाएंगे। कैलास पाटिल, विधायक, ने कहा कि उनका पार्टी प्रमुख जो भी निर्णय लेंगे, वे उसे स्वीकार करेंगे।

भाजपा और शिवसेना के बीच समीकरणों में बदलाव

पिछले महीने, महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और उद्धव ठाकरे के बीच बैठक के बाद, भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) के बीच संभावित गठबंधन पर चर्चा तेज हो गई थी। उद्धव ठाकरे ने इस बैठक के बाद कहा था कि उन्होंने फड़नवीस को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देने के लिए मुलाकात की थी।

संजय राउत के बयान से महाराष्ट्र के सियासी रण में नई हलचल मच गई है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) और भाजपा के बीच गठबंधन की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह देखना होगा कि उद्धव ठाकरे इस पर क्या निर्णय लेते हैं और भविष्य में यह गठबंधन किस दिशा में बढ़ता है।

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