शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने गुरुवार को NCERT की कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) पर अध्याय शामिल किए जाने के मुद्दे पर एकनाथ शिंदे गुट और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कभी किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा था। राउत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं।
“देश 12 साल से इमरजेंसी जैसे हालात में”
मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने दावा किया कि देश पिछले 12 वर्षों से इमरजेंसी जैसे माहौल का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि 1975 में लागू आपातकाल का प्रावधान संविधान में मौजूद है और इसे केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
राउत ने कहा, “इस देश में पिछले 12 सालों से इमरजेंसी जैसे हालात हैं। इंदिरा गांधी ने न तो कोई राजनीतिक पार्टी तोड़ी और न ही संविधान को खत्म किया। आपातकाल सिर्फ इतिहास का विषय नहीं, बल्कि संविधान का हिस्सा है। देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न होने पर आपातकाल लगाने का प्रावधान संविधान में दिया गया है।”
नोटबंदी और कोविड प्रतिबंधों का भी किया जिक्र
संजय राउत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए नोटबंदी और कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि नोटबंदी क्यों लागू की गई और महामारी के दौरान इतने कड़े प्रतिबंध क्यों लगाए गए।
उन्होंने कहा, “बालासाहेब ठाकरे ने भी आपातकाल का समर्थन किया था। यदि कोई व्यक्ति सेना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाए या सरकारी आदेशों की अवहेलना करने को कहे, तो सरकार क्या करेगी?”
NCERT की नई किताब में शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय
गौरतलब है कि NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में पहली बार आपातकाल पर एक अलग खंड शामिल किया है। पुस्तक में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।
पाठ्यपुस्तक में उल्लेख किया गया है कि इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लागू थी और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।
सचिन पायलट ने भी उठाए सवाल
राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक सचिन पायलट ने भी NCERT के इस कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इतिहास को अपने नजरिए से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।
पायलट ने कहा, “जब भी भाजपा सत्ता में आती है, वह इतिहास को अपने अनुसार परिभाषित करने का प्रयास करती है। आजादी के बाद लोकतंत्र के सामने ऐसी चुनौती पहले कभी नहीं आई। सोशल मीडिया, मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का जिस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, वह चिंताजनक है।”
आपातकाल पर नई बहस
NCERT की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को शामिल किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताकर छात्रों को लोकतंत्र की चुनौतियों से परिचित कराने की पहल बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे इतिहास की राजनीतिक व्याख्या का प्रयास मान रहा है।