मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज माघ मेले में उस समय तनाव फैल गया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और उत्तर प्रदेश की होम सेक्रेटरी मोहिता गुप्ता तथा पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल गया, जिससे मेले क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
संगम स्नान किए बिना लौटे शंकराचार्य
घटना के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या का संगम स्नान करने से इनकार कर दिया। वे अपनी पालकी के साथ बीच रास्ते से ही अखाड़े वापस लौट गए। इस फैसले के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया।
राजनीतिक घमासान तेज, अखिलेश यादव का हमला
घटना सामने आते ही समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शंकराचार्य को स्नान से रोके जाने और उनके समर्थकों के साथ कथित मारपीट को निंदनीय बताया।
अखिलेश ने जांच की मांग, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार अक्षम्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लापरवाह और असंवेदनशील रवैया अपना रही है।
पुलिस का पक्ष: बिना अनुमति घाट की ओर बढ़े समर्थक
माघ मेला के पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना अनुमति 200-250 समर्थकों के साथ पुल नंबर-2 का अवरोधक तोड़कर स्नान घाट की ओर बढ़ रहे थे।
पुलिस के अनुसार, उन्हें भारी भीड़ के बारे में बताया गया था, लेकिन इसके बावजूद वे नहीं माने और स्नान किए बिना लौट गए।
शंकराचार्य पक्ष का आरोप: सुनियोजित साजिश
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि
जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी को जानबूझकर स्नान से रोका गया और यह पूरी घटना सुनियोजित साजिश थी।
समर्थकों से मारपीट का दावा
योगीराज ने दावा किया कि शंकराचार्य के समर्थक शांतिपूर्ण ढंग से संगम नोज की ओर जा रहे थे, लेकिन प्रशासनिक साजिश के तहत उन्हें धक्का दिया गया और संतों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया।