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सैम पित्रोदा के बयान पर सियासी घमासान, BJP का पलटवार

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इंडिया एआई इंपैक्ट समिट में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शर्टलेस प्रदर्शन का विवाद थमा भी नहीं था कि कांग्रेस से जुड़ा एक और बयान चर्चा में आ गया। Sam Pitroda, जो Indian Overseas Congress के प्रमुख हैं, ने आईटी सेक्टर में भारत की उपलब्धियों को लेकर टिप्पणी की, जिस पर सियासी घमासान छिड़ गया है।

“टैलेंट तैयार किया, फायदा दूसरों को मिला”

एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में सैम पित्रोदा ने कहा कि भारत ने आईटी क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा प्रतिभाएं तैयार कीं, लेकिन देश स्वयं उसका पूरा लाभ नहीं उठा सका।

उन्होंने कहा कि भारत ने सॉफ्टवेयर उद्योग में बड़ी संख्या में कुशल युवाओं को तैयार किया, पर इसका अधिक फायदा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मिला। प्रोग्रामिंग, बैंकिंग, कानूनी तंत्र, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा ने वैश्विक योगदान दिया, लेकिन देश उस स्तर की वैश्विक कंपनी या उत्पाद खड़ा नहीं कर सका।

पित्रोदा ने यह भी कहा कि भारत अपना बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या Microsoft जैसी वैश्विक कंपनी खड़ी नहीं कर पाया। उन्होंने 1.5 अरब की आबादी वाले देश के पास अपना स्वतंत्र मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम न होने को “शर्म की बात” बताया।

उन्होंने वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में अमेरिका अग्रणी है, उसके बाद चीन आता है, जबकि अन्य देश अपेक्षाकृत पीछे हैं।

भाजपा का तीखा पलटवार

सैम पित्रोदा के बयान के वायरल होते ही भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इसे भारत को बदनाम करने की कोशिश बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस का एजेंडा झूठ के जरिये देश को नीचा दिखाना है।

पूनावाला ने दावा किया कि भारत में कई स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित किए गए हैं, जिनमें BOSS Linux, Maya OS, PrimeOS, BharOS, Indus OS और NxtQuantum OS शामिल हैं।

आईटी सेक्टर पर नई बहस

इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की आईटी क्षमता और उपलब्धियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सैम पित्रोदा का तर्क है कि भारत को अपनी प्रतिभा का उपयोग घरेलू नवाचार और वैश्विक स्तर की कंपनियां खड़ी करने में करना चाहिए था।

भाजपा का दावा है कि देश तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है और कई स्वदेशी समाधान पहले से मौजूद हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वैश्विक आईटी ताकतों में से एक है और दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में भारतीय पेशेवरों की मजबूत भागीदारी है। हालांकि, यह भी सच है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी और चीनी कंपनियों का दबदबा अधिक दिखाई देता है।

फिलहाल, सैम पित्रोदा के बयान ने सियासी हलकों में नई गर्मी पैदा कर दी है और तकनीक, आत्मनिर्भरता व नवाचार जैसे मुद्दों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव तेज होता नजर आ रहा है।

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