NATIONAL THOUGHTS

A Web Portal Of Positive Journalism 

Sakat Chauth 2024: Women must read this story, the fast of Sakat Chauth is incomplete without this fast story.

Sakat Chauth 2024 : महिलाएं जरूर पढ़ें ये कहानी, इस व्रत कथा के बिना अधूरा है सकट चौथ का व्रत

Share This Post

नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) : हिंदू धर्म में, सकट चौथ का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस विशेष दिन पर भगवान गणेश और सकट माता की आराधना की जाती है। यह व्रत स्त्रियों द्वारा दीर्घायु और सफल जीवन की कामना के साथ, अपने पति और संतान की कल्याण के लिए किया जाता है। इसे “संकट मोचन” भी कहा जाता है, क्योंकि इस व्रत का पालन करने से सभी प्रकार के संकटों का नाश होता है।


सकट चौथ पर, महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, गणेश भगवान की पूजा करती हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। इस दिन कई पौराणिक कथाएं हैं जो बताती हैं कि इस व्रत का पालन करने से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और गणेश भगवान का आशीर्वाद मिलता है। 


सकट चौथ पूजा विधि (Sakat chauth puja vidhi)
व्रत वाले दिन सुबह सुबह सिर धोकर नहा लें और हाथों में मेहंदी लगाएं. सफेद तिल और गुड़ के तिलकुट बनाएं. एक पटरे पर जल का लौटा, रोली, चावल, एक कटोरी में तिलकुट और रुपये रखें. जल के लोटे पर रोली से सतिया बनाकर 13 टिक्की करें. चौथ और गणेश जी की कहानी सुने . इस दौरान थोड़ा सा तिलकुट हाथ में ले लें. कहानी सुनने के बाद एक कटोरी में तिलकुट और रुपये रखकर सासू जी को देकर पैर छू लें. जल का लोटा और हाथ में रखें तिल उठाकर रख दें. रात को चांद को देखकर इसी जल से चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें. जो व्रत कहानी सुनाएं उसे कुछ रुपये और तिलकुट दें. व्रत खोलते समय तिलकुट और शकरकंद जरूर खाएं.

सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha)
एक बार गणेश जी बाल रूप में थोड़े से चावल और एक चम्मच दूध लेकर पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकले. पृथ्वी पर वे सबसे कहते घूम रहे थे कि कोई मेरी खीर बना दो लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया. तभी एक गरीब बुढ़िया ने उनकी आवाज सुनी और उनकी खीर बनाने के लिए तैयार हो गई. बुढ़िया के मानने पर गणेश जी ने घर का सबसे बड़े बर्तन में खीर बनाने को कहा. गणेश जी की बाल लीला समझते हुए बुढ़िया ने घर का सबसे बड़ा भगोना चूल्हे पर चढ़ा दिया.

गणेश जी ने जब वो मुठ्ठी भर चावल और दूध भगोने में डाले तो भगोना पूरा भर गया. गणेशजी उस बुढ़िया से बोले कि अम्मा जब खीर बन जाए तो मुझे आवाज दे देना. इसके बाद बुढ़िया के बेटे की बहू ने चुपके से उस भगोने से एक कटोरी खीर चुरा ली और एक कटोरी खीर छिपाकर रख ली. खीर तैयार होने के बाद बुढ़िया ने गणेश जी को आवाज लगाई. इसके बाद गणेश जी वहां पहुंचे और बोले कि मैंने तो खीर पहले ही खा ली. बुढ़िया ने पूछा कि तुम तो बाहर गए तो तुमने कब खाई तो गणेश जी बोले जब तुम्हारी बहू ने खाई. बुढ़िया को इस बात का पता चला तो उसने गणेश जी से इस पर माफी मांगी.

इसके बाद बुढ़िया ने गणेश जी से पूछा कि बाकी बची खीर का अब क्या करें, तो गणेश जी ने कि इसे नगर में बांट दो और जो बचें उसे अपने घर की जमीन में दबा दो. इतना कहकर गणेश जी वहां से चले गए. अगले दिन जब सोकर बुढ़िया उठी तो उसने देखा कि उसकी झोपड़ी महल में बदल गई है और खीर के बर्तन सोने, जवाहरातों से भरे हुए हैं. भगवान गणेश की कृपा से गरीब बुढ़िया का घर धन दौलत से भर गया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *