रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने गुजरात के जामनगर स्थित अपनी केवल निर्यात वाली (SEZ) रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर दिया है। यह कदम यूरोपीय संघ (EU) की सख्त पाबंदियों के चलते उठाया गया है।
रिलायंस भारत में रूसी कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार है और जामनगर कॉम्प्लेक्स में इसे परिष्कृत कर वैश्विक बाजारों में पेट्रोल-डीज़ल का निर्यात करती है।
EU प्रतिबंधों का सीधा असर
SEZ रिफाइनरी से यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य देशों में ईंधन निर्यात होता है, लेकिन EU ने रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए हैं।
इस बाध्यता के चलते रिलायंस ने SEZ यूनिट में रूसी तेल का उपयोग 20 नवंबर से रोक दिया है।
कंपनी के अनुसार, 1 दिसंबर से SEZ रिफाइनरी के सभी उत्पाद गैर-रूसी क्रूड से बनाए जाएंगे।
अमेरिका और यूरोप की नई पाबंदियों का दबाव
पिछले महीने अमेरिका ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों Rosneft और Lukoil पर प्रतिबंध लगा दिए थे। रिलायंस ने कहा कि वह सभी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का पालन करेगी और अपनी रिफाइनरी संचालन को इस हिसाब से समायोजित करेगी।
24 अक्टूबर को रिलायंस ने बयान दिया था कि वह EU, UK और USA की नई प्रतिबंध नीतियों का आकलन कर रही है और उनके अनुसार कदम उठाएगी।
रूसी तेल खरीद में बड़ी कटौती
जामनगर कॉम्प्लेक्स दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग हब है।
रिलायंस भारत में डिस्काउंटेड रूसी तेल की खरीद का लगभग आधा हिस्सा ले रही थी (1.7–1.8 मिलियन बैरल/दिन का)।
अब, अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद कंपनी इन आयातों को कम कर रही है।
कंपनी का अमेरिकी बाजार में बड़ा व्यापार है और वह किसी भी तरह के अनुपालन जोखिम से बचना चाहती है।
पहले से तय रूसी कार्गो होंगे पूरे, नए SEZ में नहीं
रिलायंस ने स्पष्ट किया है कि SEZ रिफाइनरी में तेल की आपूर्ति एक अलग व्यवस्था होती है।
कंपनी 22 अक्टूबर 2025 तक पहले से तय रूसी कार्गो की डिलीवरी का सम्मान करेगी क्योंकि उनकी लॉजिस्टिक व्यवस्था पहले ही तय थी।आखिरी कार्गो 12 नवंबर को लोड हुआ।
20 नवंबर के बाद आने वाला कोई भी रूसी तेल SEZ में नहीं, बल्कि घरेलू बाज़ार (DTA) रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाएगा।
EU के नए नियम और आयात रणनीति
EU ने जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
रिलायंस ने कहा है कि वह इस गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करेगी।
कंपनी ने यूरोपीय प्रतिबंधों के 18वें पैकेज के बाद से ही अपने आयात के “रिकैलिब्रेशन” यानी तेल लेने के स्रोत बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसे अब तेज़ किया जा रहा है।
भारत के तेल आयात पर असर
भारत के कुल तेल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है।
2025 में यह औसत करीब 1.7 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है, जिनमें से 1.2 mbd Rosneft और Lukoil से आता है।
इनमें से अधिकांश तेल रिलायंस और नायरा एनर्जी खरीदते हैं, जबकि सरकारी रिफाइनरियां कम हिस्सा लेती हैं।