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लाल किला ब्लास्ट: डॉ. उमर की i20 और 11 दिन की साज़िश

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लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए शक्तिशाली विस्फोट की जाँच में बड़ी सफलता हाथ लगी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में विस्फोट से पहले की गई साजिश और तैयारी से जुड़ी अहम जानकारियाँ सामने आई हैं। इस धमाके में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी और 20 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।

पाकिस्तानी कनेक्शन और डॉक्टरों का नेटवर्क

जाँचकर्ताओं ने खुलासा किया कि यह पूरी साजिश पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन **जैश-ए-मोहम्मद (JeM)** से जुड़े मेडिकल प्रोफेशनल्स के नेटवर्क द्वारा रची गई थी। इस मॉड्यूल का केंद्र बिंदु **डॉ. उमर उ नबी** था, जिसने विस्फोट से 11 दिन पहले **हुंडई i20 कार** खरीदी थी।

i20 कार से जुड़ी साज़िश

इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, i20 कार **29 अक्टूबर** को खरीदी गई थी और **फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय** के अंदर पार्क की गई थी। जांचकर्ताओं ने बताया कि 10 नवंबर की सुबह घबराए हुए डॉ. उमर उस कार को दिल्ली की ओर ले गए — उसी दिन लाल किला ब्लास्ट हुआ।
जांच में पता चला कि यह कार कई बार हाथों-हाथ बिकी और आख़िरी बार पुलवामा निवासी **तारिक** नामक व्यक्ति को बेची गई थी। इस दौरान **फर्जी दस्तावेज़ों** का इस्तेमाल किया गया, जिससे मामला सीधे पुलवामा से जुड़ गया।

आतंकी मॉड्यूल में डॉक्टरों की भूमिका

सूत्रों ने बताया कि डॉ. उमर, **डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई** और **डॉ. शाहीन शाहिद** के साथ नौ से दस सदस्यों वाले लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसमें पाँच से छह डॉक्टर शामिल थे।
इन तीनों ने अपनी पेशेवर साख का दुरुपयोग करते हुए **विस्फोटक सामग्री की खरीद**, **लॉजिस्टिक्स प्रबंधन** और **जैश-ए-मोहम्मद के लिए नेटवर्क समन्वय** का काम किया।

9 नवंबर से लापता डॉ. उमर

जाँच एजेंसियों का मानना है कि डॉ. उमर **9 नवंबर को भूमिगत हो गया**, जब इससे एक दिन पहले 2,900 किलोग्राम **अमोनियम नाइट्रेट** बरामद हुआ था। उसने अपने पाँच मोबाइल फ़ोन बंद कर दिए और **विश्वविद्यालय की ड्यूटी पर भी नहीं पहुँचा।**

कश्मीर में छापेमारी और गिरफ़्तारियाँ

जाँच का दायरा बढ़ाते हुए शोपियाँ पुलिस ने **जमात-ए-इस्लामी (JeI)** कार्यकर्ताओं से जुड़े कई ठिकानों पर छापे मारे। इनमें **डॉ. हमीद फ़याज़ (नदीगाम)** और **मोहम्मद यूसुफ़ फलाही (चित्रगाम)** के घर शामिल हैं।
इन छापों का सिलसिला **मौलवी इरफ़ान की गिरफ़्तारी** के बाद शुरू हुआ, जिसने पूछताछ में तीनों डॉक्टरों के कट्टरपंथी संबंधों का खुलासा किया।

डॉ. तजामुल मलिक और डॉ. शाहीन शाहिद पर शिकंजा

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम निवासी **डॉ. तजामुल अहमद मलिक**, जो श्रीनगर के एसएचएमएस अस्पताल में कार्यरत हैं, को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
वहीं **फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. शाहीन शाहिद** इस मॉड्यूल की प्रमुख सदस्य पाई गईं। शुरुआती जांच में सामने आया कि उन्हें प्रतिबंधित संगठन के महिला नेटवर्क **“जमात-उल-मोमिनीन”** के तहत **जैश की महिला शाखा** की स्थापना की जिम्मेदारी दी गई थी।

परवेज़ अंसारी से जुड़ा नया सुराग

शाहीन की गिरफ्तारी के बाद **उत्तर प्रदेश एटीएस**, **जम्मू-कश्मीर पुलिस** और स्थानीय अधिकारियों की संयुक्त टीम ने **लखनऊ के लालबाग स्थित उनके घर** पर छापा मारा। यहाँ उनके भाई **डॉ. परवेज़ अंसारी** से पूछताछ की गई।
परवेज़ लखनऊ के **इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज** में सीनियर रेजिडेंट थे और उन्होंने **7 नवंबर को इस्तीफ़ा** दिया था। पुलिस ने उनके घर से फोन, हार्ड डिस्क और कई अहम दस्तावेज़ जब्त किए।

पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट

इन खुलासों के बाद **सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे उत्तर प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है।** एटीएस, जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफ़िया इकाइयाँ सहारनपुर से नेपाल सीमा तक हाई अलर्ट पर हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अब भी मॉड्यूल के कुछ सदस्य फरार हो सकते हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए लगातार **छापेमारी और पूछताछ अभियान** जारी है।

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