कांग्रेस सांसद व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार विदेशी नेताओं को उनसे मिलने नहीं देती। राहुल ने कहा कि पहले (वाजपेयी व मनमोहन सिंह सरकार) के समय विपक्षी नेताओं से भी मुलाकातें होती थीं, लेकिन अब सरकार विदेशी गणमान्यों को विपक्ष से दूरी बनाने के निर्देश देती है।
इसके जवाब में भाजपा ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि राहुल गांधी ने पिछले डेढ़ वर्ष में ही कम से कम पाँच विदेशी नेताओं से मुलाकात की है —
10 जून 2024 : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना
21 अगस्त 2024 : मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम
1 अगस्त 2024 : वियतनाम के प्रधानमंत्री
8 मार्च 2025 : न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन
16 सितंबर 2025 : मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम
(कई बैठकों में सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं)
सरकार का तर्क — विदेशी नेताओं की मुलाकात उनकी इच्छा पर निर्भर
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि विदेशी नेता किससे मिलेंगे, यह उनका निर्णय होता है, न कि भारत सरकार का आदेश।
सूत्रों के अनुसार रूस की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और राहुल गांधी के कई विवादित बयानों को देखते हुए संभव है कि पुतिन ने मुलाकात में रुचि न दिखाई हो।
भाजपा के प्रतिआरोप — जिम्मेदारी पर सवाल
भाजपा न पलटकर पूछा कि जब राहुल गांधी
स्वतंत्रता दिवस समारोह,
उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण,
नए CJI के शपथ समारोह
जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं रहे, तो वह सरकार पर जिम्मेदारी न निभाने का आरोप कैसे लगा सकते हैं?
राहुल गांधी का दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता दिखता है, क्योंकि उन्होंने हाल के वर्षों में कई विदेशी नेताओं से मुलाकात की है। विपक्ष का नेता होने के नाते उनसे संवैधानिक परंपराओं का सम्मान और निरंतरता की अपेक्षा रहती है।
वहीं विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषय पर दोनों पक्षों से शालीन और परिपक्व संवाद की आवश्यकता है, क्योंकि विश्व राजनीति में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।