राधा और कृष्ण का प्रेम विश्व की सबसे पवित्र और अलौकिक प्रेम कथाओं में से एक है। वृंदावन की गलियों, यमुना के तट और गोपियों के रास में यह कथा आज भी जीवंत है। लेकिन भक्तों के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता है कि क्या मथुरा जाने के बाद राधा और कृष्ण का पुनर्मिलन हुआ था?
राधा-कृष्ण का प्रेम
राधा और कृष्ण का प्रेम सांसारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और दैवीय था। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, राधा श्रीकृष्ण की परम भक्त और उनकी शक्ति स्वरूप थीं। वृंदावन में रासलीला, बंसी की मधुर धुन और यमुना के तट पर बिताए गए क्षण उनके प्रेम की महानता दर्शाते हैं। किंतु कंसवध हेतु कृष्ण को मथुरा जाना पड़ा, जिससे उनका शारीरिक बिछोह हो गया। यह बिछोह उनके प्रेम को और भी गहरा व मार्मिक बनाता है।
बिछड़ने के बाद क्या हुआ?
पौराणिक ग्रंथों में राधा और कृष्ण के पुनर्मिलन का स्पष्ट विवरण नहीं मिलता, किंतु कुछ उल्लेख विभिन्न पुराणों में मिलते हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण का वर्णन
इस पुराण में राधा को कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति बताया गया है। इसमें उल्लेख है कि राधा और कृष्ण का बिछोह केवल शारीरिक था, आत्मिक नहीं। राधा वृंदावन में रहीं, किंतु अपनी भक्ति और प्रेम के माध्यम से वे सदैव कृष्ण के साथ जुड़ी रहीं।
गर्ग संहिता का दृष्टिकोण
गर्ग संहिता के अनुसार, राधा ने मथुरा में कृष्ण से मुलाकात की थी। यह मिलन गोपनीय और भावनात्मक था, किंतु संक्षिप्त। इसके बाद कृष्ण अपने दैवीय कर्तव्यों में आगे बढ़ गए।
पद्म पुराण और लोककथाएं
पद्म पुराण में राधा का अप्रत्यक्ष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि राधा का विवाह रायण नामक गोप से हुआ था, किंतु उनका हृदय सदैव कृष्ण के साथ ही रहा। लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि राधा और कृष्ण का कई बार गुप्त रूप से मिलन हुआ, विशेषकर यमुना के तट या वृंदावन के कुंजों में।
गोलोक में राधा-कृष्ण का शाश्वत मिलन
भक्ति परंपराओं के अनुसार, राधा और कृष्ण का वास्तविक मिलन गोलोक धाम में हुआ। गोलोक को कृष्ण का शाश्वत धाम माना जाता है, जहाँ राधा उनकी अनंत संगिनी हैं। इस दृष्टिकोण से उनका बिछोह केवल भौतिक जगत में था, जबकि गोलोक में वे सदा एक साथ, रासलीला में लीन हैं।