लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद कार्यालय में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों की चिंताओं पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी ने किसानों की बात सुनते हुए उनके हितों की रक्षा का भरोसा दिलाया।
किसान संघों ने जताई गहरी चिंता
बैठक में देशभर के 17 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसान नेताओं ने आशंका जताई कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय कृषि के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
विशेष रूप से मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे की खेती करने वाले किसानों पर इसके नकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात कही गई।
किसान प्रतिनिधियों का कहना था कि—
इससे किसानों की आय घट सकती है
कृषि क्षेत्र के लिए मौजूद सुरक्षा उपाय कमजोर हो सकते हैं
जरूरत पड़ी तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाना होगा
भाजपा का पलटवार: ‘सुनियोजित राजनीतिक ड्रामा’
इस मुलाकात पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि इसे किसानों की बैठक बताया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा थी।
पार्टी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर इस बैठक को किसानों से जुड़ा मुद्दा बताकर पेश किया और देश को गुमराह करने की कोशिश की।
कांग्रेस पर गंभीर आरोप
भाजपा के अनुसार, राहुल गांधी और कांग्रेस ने पहले कई संस्थाओं और समुदायों का राजनीतिकरण किया है और अब किसानों को भी राजनीति का माध्यम बनाया जा रहा है।
भाजपा ने कहा कि सुनियोजित राजनीति कभी वास्तविक नेतृत्व का स्थान नहीं ले सकती और देश को दिखावे नहीं, बल्कि ईमानदार नेतृत्व की जरूरत है।
राहुल गांधी की किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात ने एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को तेज कर दिया है। जहां कांग्रेस इसे किसानों की आवाज़ सुनने की पहल बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और सियासी गर्माहट पैदा कर सकता है।