राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए बजट सत्र 2026-27 के पहले दिन केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और विकसित भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। यह संबोधन 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र और राज्यसभा के 270वें सत्र के उद्घाटन अवसर पर हुआ।
भारत की विरासत और प्रगति का उल्लेख
अपने संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि संसद को संबोधित करना उनके लिए प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने बताया कि पिछला वर्ष भारत की तीव्र प्रगति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के रूप में यादगार रहा।
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में समारोह आयोजित किए गए, जिनमें नागरिकों ने बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
महापुरुषों को श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय एकता
राष्ट्रपति ने कहा कि देश ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आदिवासी समुदाय के प्रति उनके योगदान को याद किया गया।
सरदार पटेल की 150वीं जयंती से जुड़े आयोजनों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और सशक्त किया। भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती ने देश को संगीत और एकता के सूत्र में पिरो दिया।
सामाजिक न्याय पर सरकार का जोर
सामाजिक न्याय पर बल देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता और सामाजिक न्याय को संविधान का मूल आधार बनाया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपने अधिकार मिलने चाहिए और सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने के प्रयास और तेज किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 2014 में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं केवल 25 करोड़ लोगों तक सीमित थीं, जबकि अब लगभग 95 करोड़ नागरिक इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
वीबी-जी-आरएएम जी अधिनियम पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने एमएनआरईजीए के स्थान पर लागू किए गए नए विकसित भारत–जी-आरएएम जी अधिनियम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास को गति देने के लिए लाया गया है।
इस अधिनियम के तहत गांवों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इस दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने तालियां बजाईं, जबकि विपक्ष ने विरोध दर्ज कराया।
विकसित भारत की ओर निर्णायक कदम
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों ने सभी क्षेत्रों में मजबूत नींव रखी है। उन्होंने इस वर्ष को विकसित भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण आधार बताया।