दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल अब सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने पंजाब में पार्टी के विधायकों और मंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक उस समय हो रही है जब कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया कि वे पंजाब में आप के करीब 30 विधायकों के संपर्क में हैं।
कांग्रेस के दावे और विपक्षी रणनीति
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, जहां भाजपा ने 27 साल बाद सत्ता हासिल की और आप के 10 साल लंबे शासन का अंत किया, पंजाब कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि वह लंबे समय से आप विधायकों के संपर्क में हैं। बाजवा ने दावा किया कि पंजाब में आप को आंतरिक कलह और संभावित विभाजन का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की हार के बाद पार्टी नेतृत्व भगवंत मान को हटाने की योजना बना सकता है। बाजवा ने लुधियाना (पश्चिम) उपचुनाव का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि केजरीवाल इस सीट पर नजर गड़ाए हुए हैं और खुद विधानसभा में प्रवेश करने की योजना बना सकते हैं।
AAP का जवाब
कांग्रेस के इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, पंजाब आप के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने कहा, “केजरीवाल हमारे राष्ट्रीय संयोजक हैं और भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री। कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है। दिल्ली में उसका स्कोर लगातार तीन बार शून्य रहा है। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के केवल 18 विधायक थे, और 2027 में यह आंकड़ा और नीचे जाएगा।”
आप की पंजाब में स्थिति
2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया था। हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब पंजाब में आप की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। हालिया नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा, जिससे विपक्ष की ओर से उठाए गए दावों को बल मिलता है।
आगे की रणनीति
आप की इस बैठक में पार्टी नेतृत्व पंजाब में अपनी स्थिति को मजबूत करने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा करेगा। अरविंद केजरीवाल खुद इस बैठक का नेतृत्व करेंगे, जो पार्टी के लिए आने वाले समय में अहम साबित हो सकती है।