नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान शिव के प्रसन्न होने की कठिनाइयों को दूर करता है और उनकी कृपा को आत्मसात करता है। प्रदोष का नामकरण उस वार के अनुसार किया जाता है, जैसे सोम प्रदोष और भौम प्रदोष।
धार्मिक मान्यता है कि भौम प्रदोष के दिन भोलेनाथ के साथ हनुमान जी की पूजा करने से मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से राहत मिलती है। कहा जाता है कि इस दिन हनुमान जी से जुड़े कुछ मंत्रों का जाप करने से परेशानियां दूर हो जाती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। चलिए जानते हैं उन मंत्रों के बारे में …………
ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति का मंत्र
मनोजवं मारुतुल्यवेगं जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।
बल और पराक्रम प्राप्ति का मंत्र
अतुलित बलधामं, हेमशैलाभदेहमं। दनुजवनकृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुण निधानं, वानराणामधीशम्। रघुपतिप्रिय भक्तं वातजातम् नमामि।।
रोग और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का मंत्र
ओम नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसहांरणाय,
सर्वरोगाय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।
भौम प्रदोष व्रत के दौरान पढ़ें ये 21 नाम
- मंगल
- भूमिपुत्र
- ऋणहर्ता
- धनप्रदा
- स्थिरासन
- महाकाय
- सर्वकामार्थ साधक
- लोहित
- लोहिताक्ष
- सामगानंकृपाकर
- धरात्मज
- कुंजा
- भूमिजा
- भूमिनंदन
- अंगारक
- भौम
- यम
- सर्वरोगहारक
- वृष्टिकर्ता
- पापहर्ता
- सर्वकामफलदाता।