प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पोलैंड पहुंचकर अपने दो देशों के दौरे की शुरुआत की, जिसमें वह यूक्रेन की राजधानी कीव भी जाएंगे। पोलैंड में अपने संबोधन में, मोदी ने भारतीयता के भाव से जुड़ी बातों का उल्लेख किया और पोलैंड की जनता द्वारा किए गए स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत, बुद्ध की विरासत वाली धरती है, जो युद्ध नहीं, बल्कि शांति पर विश्वास करती है। भारत इस क्षेत्र में स्थायी शांति का समर्थक है और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश फैलाता है। उन्होंने बताया कि भारत का कल्चर और उसकी नीति वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिसमें सभी देशों के साथ जुड़ने और उनके विकास की बात की जाती है। आज दुनिया भारत को विश्व बंधु के रूप में मान्यता दे रही है।
मोदी ने कहा कि भारत की प्राथमिकता इकोनॉमी और इकोलॉजी में संतुलन है। भारत ने विकसित भारत और नेट जीरो नेशन के संकल्प को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में काम किया है। उन्होंने बताया कि भारत 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे के अवसर पर चंद्रयान-3 को चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतारकर इतिहास रच चुका है। जहां कोई अन्य देश नहीं पहुंच पाया, वहां भारत ने अपना चंद्रयान उतारा और उस स्थान का नाम ‘शिवशक्ति’ रखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत 2047 तक खुद को एक विकसित देश बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारतीय लोकतंत्र में लोगों का अटूट विश्वास है, जो हाल के चुनावों में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। भारत एक पार्टिसिपेटिव और वाइब्रेंट डेमोक्रेसी है, जो समृद्ध भारत के सपने को साकार करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
मोदी ने भारतीयों की पहचान को ‘empathy’ बताया और कहा कि किसी भी देश में संकट आने पर भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे बढ़ता है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन भेजी। भूकंप या आपदा की स्थिति में भी भारत का मंत्र ‘Humanity first’ रहता है। भारत हर संकट में मदद के लिए तत्पर रहता है और यही उसका वैश्विक दृष्टिकोण है।