प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को तीन दिवसीय दौरे पर दक्षिण अफ्रीका रवाना हुए। अफ्रीकी महाद्वीप पर पहली बार आयोजित हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन में वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके साथ ही वे छठे आईबीएसए (भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे।
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ पर आधारित भारतीय दृष्टिकोण
प्रस्थान से पहले पीएम मोदी ने कहा कि वे भारत का दृष्टिकोण साझा करेंगे, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना पर आधारित है।
यह जी20 की लगातार चौथी बैठक है जिसे ग्लोबल साउथ ने होस्ट किया है—इंडोनेशिया, भारत, ब्राज़ील और अब दक्षिण अफ्रीका।
दक्षिण अफ्रीका का महत्व और पीएम मोदी का दौरा
21 से 23 नवंबर तक होने वाला यह शिखर सम्मेलन अफ्रीका में आयोजित पहला जी20 समिट है।
यह प्रधानमंत्री मोदी का दक्षिण अफ्रीका का चौथा आधिकारिक दौरा है—2016 के द्विपक्षीय दौरे और 2018 व 2023 के BRICS सम्मिटों के बाद।
जी20 की प्राथमिकताएँ और ग्लोबल साउथ का एजेंडा
विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी (ER) सुधाकर दलेला ने बताया कि जी20 एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच है, जहां पिछली बैठकों में कई अहम मुद्दों पर सर्वसम्मति बनी थी।
दलेला के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका ने अपनी प्रेसीडेंसी में चार मुख्य वर्टिकल्स को आगे बढ़ाया है और इनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं।
ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को भी व्यापक रूप से प्राथमिकता दी जा रही है।
जी20 की वैश्विक ताकत
G20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो वैश्विक GDP का 85% और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 75% हिस्सा रखता है।
दक्षिण अफ्रीका ने अपनी प्रेसीडेंसी की थीम ‘सॉलिडैरिटी, इक्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी’ निर्धारित की है।
भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंध और बाइलेटरल मीटिंग्स
G20 के दौरान होने वाली संभावित द्विपक्षीय बैठकों को लेकर तैयारी जारी है।
दलेला ने बताया कि भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों लोकतांत्रिक देश हैं और उनका सहयोग तीन स्तंभों—राजनीतिक, आर्थिक और बहुपक्षीय सहयोग—पर आधारित है।
अफ्रीकन यूनियन की महत्वपूर्ण भूमिका
इंडिया की 2023 प्रेसीडेंसी के दौरान G20 का स्थायी सदस्य बने अफ्रीकन यूनियन की भूमिका इस बार और भी महत्वपूर्ण होगी।
समिट के एजेंडा को आकार देने में इसका प्रमुख योगदान रहेगा।