NATIONAL THOUGHTS

A Web Portal Of Positive Journalism 

Sansad Diary: शाह–खड़गे में तगड़ी नोकझोंक, दोनों सदनों में तीखी बहस

Share This Post

संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में राजनीतिक तापमान चरम पर रहा।
एक ओर लोकसभा में चुनाव सुधार चर्चा का मुख्य विषय बना रहा, वहीं राज्यसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस के दौरान अमित शाह और मल्लिकार्जुन खरगे आमने-सामने दिखाई दिए।

लोकसभा की कार्यवाही — चुनाव सुधार पर 10 घंटे की विशेष चर्चा

लोकसभा में चुनाव सुधारों पर व्यापक चर्चा हुई जिसमें कई प्रमुख बिंदुओं पर विचार रखा गया:

राहुल गांधी

‘वोट चोरी’ को सबसे बड़ा राष्ट्र-विरोधी अपराध बताया

सत्ताधारी पक्ष और आरएसएस पर संस्थाओं पर कब्ज़े का आरोप

ईवीएम डाटा, मतदाता सूची और CCTV रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

मनीष तिवारी

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को कानूनी आधारहीन बताते हुए इसे बंद करने की मांग

CEC व EC की नियुक्ति में CJI और विपक्ष के नेता को शामिल करने का सुझाव

EVM हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव की वकालत

BJP सांसद संजय जायसवाल

दावा—देश की मतदाता सूची में ‘अवैध घुसपैठिए शामिल’, SIR के बाद बाहर किया जाएगा

बिहार SIR में 35 लाख संदिग्ध प्रविष्टियों का उल्लेख

अखिलेश यादव

चुनाव सुधार तभी संभव जब चुनाव आयोग निष्पक्ष हो

ईवीएम हटाने और मतपत्र वापसी की मांग

दयानिधि मारन (DMK)

कहा—निर्वाचन आयोग नागरिकता तय नहीं कर सकता

हर भारतीय को मतदान का अधिकार

NDA सहयोगी TDP व JDU

आरोप—कांग्रेस आयोग के कार्य की सराहना करने के बजाय उस पर हमले कर रही

TMC सांसद कल्याण बनर्जी

भाजपा पर बंगालियों के प्रति नफरत का आरोप

दावा—रोहिंग्या का मुद्दा राजनीतिक रूप से इस्तेमाल

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

इंडिगो उड़ानों में अव्यवस्था पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया

फसल नुकसान पर शिवराज सिंह चौहान ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया

राज्यसभा—वंदे मातरम् पर तीखा सामना

 सभापति सी.पी. राधाकृष्णन

वंदे मातरम् को अमर स्तुति गीत बताया

सदन से एकता और राष्ट्र सेवा का संकल्प लेने का आग्रह

गृह मंत्री अमित शाह

कहा—यदि गीत के दो हिस्से न होते तो विभाजन भी नहीं होता

वंदे मातरम् के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद किया

मल्लिकार्जुन खरगे

आरोप—भाजपा नेहरू का अपमान करती है

कहा—वंदे मातरम् के पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत बनाने का निर्णय सामूहिक था, सिर्फ नेहरू का नहीं

गांधी, टैगोर व अन्य नेताओं की सहमति का उल्लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *