उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। बुधवार को उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
इस पांच सदस्यीय एसआईटी की अध्यक्षता देहरादून की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलूनी करेंगी।
सरकार का रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चेतावनी दी कि उनकी सरकार “नकल जिहादियों” को मिट्टी में मिलाने तक चैन से नहीं बैठेगी।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बताया कि जांच पूरे प्रदेश में होगी और एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
जांच प्रक्रिया और दायरा
एसआईटी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की पूर्ण निगरानी में कार्य करेगी।
दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
लापरवाह कक्ष निरीक्षक, सुपरवाइजर या किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
यूकेएसएसएससी से अनुरोध किया जाएगा कि जांच पूरी होने तक परीक्षा संबंधी आगे की कार्यवाही न की जाए।
पेपर लीक कैसे हुआ?
परीक्षा के तीन पन्नों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
मुख्य आरोपी खालिद मलिक ने हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र की फोटो खींची और अपनी बहन साबिया को भेजी।
साबिया ने टिहरी की सहायक प्रोफेसर सुमन से उत्तर प्राप्त किए।
सुमन को शक हुआ और उसने स्क्रीनशॉट साझा कर दिए, जो सोशल मीडिया पर अपलोड हो गए।
पुलिस ने खालिद और उसकी बहन साबिया को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्यमंत्री का बयान: “नकल जिहादियों को मिट्टी में मिलाएंगे”
धामी ने कहा कि युवाओं का भविष्य अंधकारमय करने के लिए संगठित रूप से षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।
कोचिंग और नकल माफिया “नकल जिहाद” छेड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके बाद पिछले 4 वर्षों में 25 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी मिली।
2022 से अब तक 100 से अधिक नकल माफिया जेल भेजे जा चुके हैं।
विपक्ष और युवाओं का आक्रोश
बेरोजगार संघ से जुड़े युवा लगातार प्रदर्शन और धरना कर रहे हैं।
कांग्रेस ने इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है।
26 सितंबर को प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस धरना आयोजित करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पेपर लीक मामले को “नकल जिहाद” का नाम देकर असल मुद्दे से ध्यान भटका रही है।