अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस समझौते को केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
पार्टी का आरोप है कि इस समझौते में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका भारत के लिए चिंता का विषय है और यह मोदी सरकार की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
जयराम रमेश ने X पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते का आधिकारिक दस्तावेज जारी कर दिया गया है और इसे “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)” नाम दिया गया है। रमेश के अनुसार, समझौते का यह नाम ही पाकिस्तान की बढ़ती क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय भूमिका की ओर संकेत करता है।
पाकिस्तान की भूमिका पर जताई चिंता
जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान वही देश है जिसे 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काफी हद तक अलग-थलग कर दिया गया था।
उन्होंने दावा किया कि आज पाकिस्तान का पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में बढ़ता प्रभाव भारत के लिए गंभीर और दूरगामी परिणाम पैदा कर सकता है। कांग्रेस नेता के मुताबिक यह घटनाक्रम मोदी सरकार की विदेश नीति की दिशा और कार्यशैली दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत देता है।
समझौते को बताया अहम लेकिन चुनौतीपूर्ण
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यदि यह समझौता अपने मूल उद्देश्यों के अनुरूप लागू होता है तो इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर कई चुनौतियां मौजूद हैं।
उनके अनुसार आने वाले 60 दिन इस समझौते की वास्तविक प्रभावशीलता को परखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
ईरान की कूटनीतिक सफलता का दावा
रमेश ने कहा कि इस समझौते से ईरान को कई महत्वपूर्ण लाभ मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ईरान ने अपनी दृढ़ता और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है।
कांग्रेस नेता के अनुसार खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने भी इस समझौते का सतर्क स्वागत किया है, लेकिन इसके बाद वे क्षेत्रीय समीकरणों और अपने कूटनीतिक संबंधों की समीक्षा कर सकते हैं।
नेतन्याहू पर भी कांग्रेस का निशाना
जयराम रमेश ने इस समझौते को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए राजनीतिक झटका बताया। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले की तुलना में अधिक अलग-थलग दिखाई दे रहे हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में इजराइल की नीतियों को लेकर दुनिया के कई देशों का रुख बदल रहा है, लेकिन भारत सरकार अब भी इजराइल के प्रति अपने समर्थन की नीति पर कायम है।
मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल के साथ संबंधों को लेकर सरकार का दृष्टिकोण भारत के दीर्घकालिक हितों के अनुरूप नहीं दिखता।
उन्होंने दावा किया कि हालिया घटनाक्रमों ने यह दिखाया है कि केवल सैन्य शक्ति के आधार पर सभी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर कांग्रेस के इस हमले के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक ओर कांग्रेस इसे मोदी सरकार की विदेश नीति की विफलता बता रही है, वहीं केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।