पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इस्लामाबाद के अनुरोध पर बुलाई गई बैठक को बिना किसी नतीजे या औपचारिक घोषणा के समाप्त कर दिया। न कोई बयान जारी हुआ, न प्रेस विज्ञप्ति, और न ही किसी प्रतिनिधि ने टिप्पणी की।
बंद दरवाजों के पीछे हुई चर्चा, लेकिन बेनतीजा
परामर्श कक्ष में हुई बातचीत
बैठक न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सोमवार दोपहर को हुई थी। यह चर्चा एक अलग परामर्श कक्ष में आयोजित की गई, न कि परंपरागत घोड़े की नाल जैसी मेज वाली मुख्य बैठक कक्ष में। चर्चा ऐसे समय में हुई जब महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भारत-पाक तनाव को “वर्षों का उच्चतम स्तर” बताया था।
सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य बना पाकिस्तान
झूठे दावों की कोशिश
वर्तमान में पाकिस्तान 15-सदस्यीय UNSC का अस्थायी सदस्य है और मई महीने के लिए यूनान इसका अध्यक्ष है। बैठक में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने एक बार फिर भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाए। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले से ध्यान हटाते हुए कश्मीर और सैन्य तनाव के मुद्दे को उठाया।
सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाकर भटकाव की कोशिश
भारत पर आक्रामकता का आरोप
पाकिस्तान ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने को “आक्रामक कार्रवाई” करार दिया। भारत का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के समर्थन पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने के लिए आवश्यक था। पाकिस्तान ने भारत पर चिनाब और झेलम नदी के प्रवाह को रोकने का आरोप भी लगाया।
भारत विरोधी चालें हुईं नाकाम
UNSC में नहीं मिला कोई समर्थन
बैठक से पहले भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने स्पष्ट किया कि ऐसी बैठकों से कोई व्यावहारिक परिणाम की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत ऐसे प्रयासों को पहले भी विफल करता रहा है।” अगस्त 2019 में भी ऐसा ही हुआ था, जब चीन के समर्थन से बुलाई गई बैठक बिना किसी निर्णय के खत्म हो गई थी।
पाकिस्तान को फिर मिला कूटनीतिक झटका
एक बार फिर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को घेरने की कोशिश नाकाम रही। UNSC के अधिकतर सदस्यों ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-पाक विवाद को द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जाना चाहिए, न कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उछालकर।