बुधवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के विरोध और हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, लोकसभा की कार्यवाही भी इसी समय तक स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के कारण सदन में शून्यकाल नहीं हो सका। राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश ने बैठक की शुरुआत में आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाए, लेकिन विरोध के चलते कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
संसद परिसर में विपक्ष का काले कपड़ों में विरोध
संसद के बाहर भी विरोध का सिलसिला जारी रहा। ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (INDIA)’ के घटक दलों के कई सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने काली कमीज पहन रखी थी और कई सांसदों ने बांह पर काली पट्टी भी बांधी हुई थी।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेता रहे शामिल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, और अन्य विपक्षी नेता संसद के ‘मकर द्वार’ के पास विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान “मोदी सरकार हाय-हाय” और “मोदी सरकार डाउन-डाउन” जैसे नारे लगे।
ऑपरेशन सिंदूर और एसआईआर पर चर्चा की मांग
विपक्षी नेताओं ने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि पहलगाम हिंसा और ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संसद में चर्चा कब होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे जवाब देने की भी मांग की।
“वोटबंदी” का आरोप, सरकार पर बड़ा हमला
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा,”बिहार में जो प्रक्रिया (एसआईआर) शुरू हुई है, वह पूरे देश में फैलाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि जो भाजपा को वोट नहीं देते, उनका मताधिकार छीना जाए। यह वोटबंदी है, और इसका हम पुरजोर विरोध करेंगे।”उन्होंने एसआईआर और पहलगाम मामले पर संसद में जल्द चर्चा कराने की मांग भी दोहराई।