महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी घटनाक्रम के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट और राज्य में चर्चा का विषय बने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। पार्टी को एकजुट रखने और संभावित बगावत को रोकने के लिए उन्होंने गुरुवार सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित पार्टी के संसदीय कार्यालय में अहम बैठक बुलाई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा के अपने सभी सांसदों को बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश देते हुए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है।
बागी सांसदों के दावों के बाद बढ़ी हलचल
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यूबीटी के असंतुष्ट नेताओं के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर दावा किया कि उन्हें लोकसभा में पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन प्राप्त है।
इसी दावे के बाद पार्टी नेतृत्व सतर्क हो गया और सभी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए संसदीय बैठक का आयोजन किया गया। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
शिंदे गुट की ताकत बढ़ने की अटकलें
वर्तमान में लोकसभा में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पांच सांसद हैं। यदि यूबीटी के पांच या अधिक सांसद उनके साथ जाते हैं तो शिंदे गुट की संख्या 11 तक पहुंच सकती है।
हालांकि, दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी गुट को वैधानिक मान्यता पाने के लिए दो-तिहाई सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इसी वजह से मौजूदा घटनाक्रम को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है।
लोकसभा अध्यक्ष से मिला यूबीटी प्रतिनिधिमंडल
संभावित दलबदल की आशंकाओं के बीच यूबीटी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने अध्यक्ष से किसी भी कथित गैर-कानूनी दलबदल को रोकने की मांग की।
पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया है कि यदि इस संबंध में कोई मामला उनके सामने आता है तो सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
संजय राउत का बड़ा आरोप
संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में कुछ लोकसभा सांसदों को पार्टी बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई है।
राउत के इस आरोप ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं।
अनिल देसाई ने बताया दलबदल कानून का प्रावधान
लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने स्पष्ट किया कि केवल दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का दावा करने भर से किसी गुट का दूसरी पार्टी में विलय नहीं हो सकता।
संजय राउत के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देसाई ने कहा कि नियमों के अनुसार विलय का फैसला मूल राजनीतिक दल से जुड़ा होता है और अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई समूह यह दावा करता है कि उसे दो-तिहाई सांसदों का समर्थन प्राप्त है, तब भी केवल इसी आधार पर उसे मान्यता नहीं मिल सकती। कानून के तहत मूल पार्टी की भूमिका और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
उद्धव ठाकरे के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती
मौजूदा घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में दिल्ली में बुलाई गई संसदीय बैठक को पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बैठक के बाद यूबीटी अपने सांसदों को एकजुट रखने में कितनी सफल होती है और महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।