जब पहलगाम में आतंकियों ने हमला किया था, तो यह सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर आघात था। भारत ने जवाब में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इन हमलों के बाद पाकिस्तान की हरकतों में कोई बदलाव नहीं आया, तो भारत ने तय किया कि हर खून का बदला खून से लिया जाएगा।
सटीक स्ट्राइक: स्टैंडऑफ वेपन का इस्तेमाल
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POJK) के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। एयर फोर्स और आर्मी की स्ट्राइक एक साथ की गई, जिसमें स्टैंडऑफ वेपन का इस्तेमाल किया गया। यह हमला फाइटर जेट Mirage-2000 द्वारा स्पाइस 2000 बम से किया गया, जो बिना पाकिस्तान के एयरस्पेस में प्रवेश किए, 60 किलोमीटर तक टारगेट को निशाना बना सकता है। राफेल फाइटर जेट का भी इस ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया।
पाकिस्तान के 9 ठिकानों को क्यों चुना गया?
इन नौ ठिकानों को चुनने के पीछे भारतीय सेना की रणनीति थी, क्योंकि ये आतंकियों के ट्रेनिंग और रिक्रूटमेंट के केंद्र थे।
पीओजेके में सवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद: लश्कर-ए-तैबा का ट्रेनिंग सेंटर था, जहां आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती थी।
पीओजेके में सेदना बिलाल कैंप: जैश-ए-मोहम्मद का स्टेजिंग एरिया था, जहां आतंकियों को जंगल सर्वाइवल और विस्फोटकों की ट्रेनिंग दी जाती थी।
पीओजेके में कोटली गुलपुर: लश्कर-ए-तैबा का बेस, जो रजौरी और पुंछ में सक्रिय था।
पीओजेके, बिंबर: यहां हथियार चलाने और IED की ट्रेनिंग दी जाती थी।
पीओजेके में अब्बास कैंप, कोटली: लश्कर का फिदायीन प्रशिक्षण केंद्र था।
पाकिस्तान में सरजल कैंप, सियालकोट: इस कैंप में आतंकियों को जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को मारने के लिए ट्रेन किया गया था।
पाकिस्तान में महमूना जोया कैंप, सियालकोट: हिजबुल मुजाहिद्दीन का बड़ा कैंप था, जो पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार था।
पाकिस्तान में मरकज तयिबा, मुरीदके: लश्कर का हेडक्वार्टर था, जहां मुंबई हमले के आतंकियों को ट्रेन किया गया था।
पाकिस्तान में मरकज सुभानअल्ला, बहावलपुर: जैश का मुख्यालय, आतंकियों की रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग का केंद्र था।
भारत की रणनीति: जवाबी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ी
भारत ने यह हमला रणनीतिक रूप से उन ठिकानों पर किया जो आतंकियों के प्रशिक्षण और योजना का केंद्र थे। पाकिस्तान की नापाक हरकतों का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया और इस ऑपरेशन ने यह साबित किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है।