उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की उस टिप्पणी का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने प्रोटोकॉल के पालन की मांग की थी। दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह स्वयं भी इस तरह की अनदेखी के शिकार हुए हैं।
“मैं भी पीड़ित हूं”: उपराष्ट्रपति ने साझा किया अपना अनुभव
धनखड़ ने कहा, “आपने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तस्वीरें तो देखी होंगी, लेकिन उपराष्ट्रपति की तस्वीरें शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से नजर आती हैं। एक बार जब मैं पद छोड़ दूंगा, तो सुनिश्चित करूंगा कि मेरे उत्तराधिकारी की तस्वीर अवश्य लगे। मैं भी इस मामले में पीड़ित हूं।”
CJI गवई की नाराज़गी पर क्या बोले उपराष्ट्रपति?
धनखड़ की ये टिप्पणी उस वक्त आई जब एक दिन पहले CJI गवई ने महाराष्ट्र के दौरे पर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वागत न किए जाने को लेकर नाराज़गी जाहिर की थी। मुंबई में उनके आगमन पर राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और मुंबई पुलिस कमिश्नर मौजूद नहीं थे, हालांकि बाद में जब उन्होंने चैत्यभूमि का दौरा किया, तो सभी अधिकारी मौजूद थे।
“पद का सम्मान जरूरी”: लोकतंत्र में प्रोटोकॉल का महत्व
धनखड़ ने कहा, “देश के मुख्य न्यायाधीश और उनके पद को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है। जब उन्होंने यह टिप्पणी की, तो वह व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि उनके संवैधानिक पद के सम्मान की बात थी।” उन्होंने आगे कहा कि प्रोटोकॉल का पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था के संचालन के लिए अनिवार्य है, और नौकरशाही के सभी स्तरों पर इसका सम्मान किया जाना चाहिए।