NATIONAL THOUGHTS

A Web Portal Of Positive Journalism 

In the Sanatani tradition, the conception ceremony has been given a very important place.

NUTRI-CON-2023 : सुखी समाज के उज्जवल भविष्य के लिए मातृ शिशु पोषण एवं आहार विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

Share This Post

नई दिल्ली, रजनीकान्त तिवारी /गायत्री पाल (नेशनल थॉट्स ) – सनातनी परम्परा में गर्भाधान संस्कार को बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। विद्वानों का मानना है कि गर्भकाल में खान पान, रहन सहन और आचार व्यवहार का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर बहुत गहरा होता है। उदाहरण के लिए हमारे ग्रन्थों में कई दृष्टांत बताए जाते हैं।
In the Sanatani tradition, the conception ceremony has been given a very important place.
जैसे एक प्रमुख दृष्टांत है अभिमन्यु का गर्भ में चक्रव्यूह को भेदने की कला सीखना। लेकिन उनकी माता को निद्रा आ जाने के कारण अंतिम द्वार भेदना नहीं सीख पाना। इन्ही सब संदर्भों को ध्यान में रखते हुए *दादी माँ रुक्मणी देवी फाउन्डेशन* की ओर से दिल्ली के लाजपत भवन ऑडिटोरियम में एक दिवसीय “शिशु आहार एवं पोषण” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं शंखनाद के साथ किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर श्रीमद् दयानन्द वेदर्षि गुरुकुल महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा मंगलाचरण  पाठ के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में देश के जाने माने शिशु विशेषज्ञों ने अपनी राय व्यक्त की।
कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सांसद एवं मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बताया कि गर्भधारण के समय पारंपरिक परिवेश को लोग भूलते जा रहे है जैसे खानपान मे बदलाव और रहन सहन में आधुनिक परंपराओं को अपनाने से महिलाओं और नवजात शिशुओं पर भी इसका दुष्प्रभाव दिखाई दे रहा है । प्राचीन परंपराओं और ग्रामीण परिवेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा की लोगों को मिट्टी का बर्तन ओर मोटे अनाज का सेवन करना चाहिए जिससे गर्भावस्था में महिलाओं एवं  शिशुओं के लिए लाभप्रद होगा ।

 

(DMRDF) के चेयरमैन डॉ. वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि  केवल माँ की ही मर्जी और हिम्मत है की वो एक ही गर्भ से दैत्य पैदा कर दे या आदित्य पैदा कर दे इसलिए माँ गर्भधारण के समय अच्छे  ओर सशक्त विचारों का अनुसरण करें ।
संस्कार और संस्कृति की परम्परा को जन जन तक पहुंचाने और समाज में बढ़ रही राक्षसी वृत्ति को समाप्त करने हेतु, कार्यक्रम का उद्देश्य, गर्भाधान के समय से ही शिशुओं में वह भाव उत्पन्न करना है, जिससे नई पीढ़ियों को इसके लिए तैयार किया जा सके।
 
प्रसार ग्रुप से राजन गुप्ता ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा वर्तमान समाज की दृष्टि से हमें अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना और स्वास्थ्य के लिए आहार का चयन करना महत्वपूर्ण है। समाज की उन्नति के लिए इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए जिससे समाज मे व्याप्त कुरीतियां दूर होगी ओर आने वाली पीढ़ी संस्कार ओर संस्कृति से सुसजित रहेगी। जिससे हमारे राष्ट्र का गौरव और बढ़ेगा ।
डॉ. रचना गुप्ता ने बताया की प्रेग्नेंसी  के समय माताओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए और घर के लोगों को ज्यादा भोजन पर ध्यान देने की बजाय पौष्टिक आहार पर ध्यान देना चाहिए । इसका उद्देश्य प्रेग्नेंट महिला को एक सुरक्षित और स्नेहपूर्ण माहौल में रखना है, जिससे उसका और उसके शिशु का दिल खुशी से भर जाता है।

तिब्बिया कॉलेज के बाल चिकित्सा विभाग के HOD डॉ. बी. एस. शर्मा – ने बताया की आयुर्वेद न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण मानता है। गर्भाधान के समय आयुर्वेद आने वाले शिशु के आध्यात्मिक विकास को भी प्रोत्साहित कर सकता है और माता-पिता को आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करती है ।
नेचुरोपैथी एक्सपर्ट(CEO,DMRDF ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशनडॉ. धर्मेन्द्र कुमार मिश्रा-  ने बताया कि स्वस्थ घर स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र अगर देखना चाहते है तो गर्भधारण के समय हम सब अपने घर में ये आदत डालें की एक दूसरे को समझे और समझने के साथ-साथ उस मातृशक्ति का जरूर ध्यान रखें जो आपके जीवन को एक नया रूप देती है ।
 
फाउंडर संदेश फाउंडेशनआशा मिश्रा – ने बताया कि आधुनिक समाज में गर्भधारण के समय महिलाएं अधिकतर समय डिजिटल मीडिया और यातायात के साथ बिताती  हैं, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग उनके  स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। स्क्रीनों का अत्यधिक उपयोग और देर रात तक जागने से बचना चाहिए।
डॉ. वंदना – ने बताया की गर्भधारण के समय माँ को कितनी मात्रा में भोजन करना चाहिए और किन-किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए ।
 श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर आचार्य कृष्ण विश्रुतपाणि – ने बताया की गर्भाधान संस्कार धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ आता है। यह गर्भवती महिला को धार्मिक और आध्यात्मिक उत्थान का अवसर प्रदान करता है और उसे एक पौष्टिक और ध्यानमय जीवन शैली का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
आचार्य गौदास ने बताया वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रेग्नेंसी के दौरान पंचगव्य  का प्रयोग काफी लाभप्रद है प्रेग्नेंसी के समय पंचगव्य के सेवन को अनिवार्य बताया।
नेशनल कोडिनेटर DMRDF नितिन बात्री ने  कार्यक्रम का प्रारम्भिक अभिवादन करते हुए कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन व स्वागत किया और बताया की आज के तनावपूर्ण जीवन में मानसिक स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। 
कार्यक्रम के प्रायोजक ग्लोब कैपिटल मार्केट लिमिटेड की सी.एस.आर. डिपार्टमेंट हेड नंदिता ने बताया की ग्लोब कैपिटल इस तरह के सामाजिक शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम के द्वारा समाज में आने वाले परिवर्तन के लिए तत्पर रहता है। कार्यक्रम मे आए अतिथियों वक्ताओं व उपस्थित गणमान्य लोगों को बहुत-बहुत बधाई एवं धन्यवाद ।
DMRDF ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन का हमेशा से यह प्रयास रहा है की पारंपरिक शिक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्था के प्रति समाज में जागरूकता कैसे बढ़ाया जाए जिसके द्वारा एक आत्मनिर्भर एवं स्वस्थ समाज परिकल्पना को वयवहारिक पटल पर परिलक्षित किया जा सके । 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *