NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द किए जाने और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारियों ने NTA के खिलाफ नारेबाजी की और परीक्षार्थियों के लिए न्याय की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ता प्रतीकात्मक रूप से ताला और जंजीर लेकर पहुंचे। उन्होंने NTA और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
NTA पर प्रतिबंध और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और NTA पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए एजेंसी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
“राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी नहीं, राष्ट्रीय भ्रष्टाचार एजेंसी”
एएनआई से बातचीत में एक प्रदर्शनकारी ने NTA को “राष्ट्रीय भ्रष्टाचार एजेंसी” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा आयोजित लगभग हर परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं।
प्रदर्शनकारी ने कहा कि छात्रों का भविष्य लगातार खतरे में डाला जा रहा है और सरकार को इसके लिए जवाबदेह होना चाहिए।
छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा भी उठाया
NSUI कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद के कारण छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने पर भी चिंता जताई।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
“भ्रष्टाचार पर सिर्फ बयानबाजी”
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भाजपा सरकार पर सिर्फ बयानबाजी करने और ठोस कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार पेपर लीक रोकने के दावे करती है, लेकिन घटनाएं रुक नहीं रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और छात्रों का भरोसा टूट रहा है।
NSUI ने जारी रखी कार्रवाई की मांग
NSUI ने दोहराया कि NTA को खत्म कर नई और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
संगठन ने कहा कि छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।