पश्चिम बंगाल में इस बार ईद के मौके पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। बताया जा रहा है कि संभवतः 1978 के बाद पहली बार राज्य में सड़कों पर ईद की नमाज अदा नहीं की गई। कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड, जो दशकों से लाखों लोगों की ईद नमाज का प्रमुख केंद्र रही है, इस बार खाली नजर आई और वहां सामान्य रूप से ट्रैफिक चलता रहा।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुई सबसे बड़ी ईद जमात
कोलकाता की सबसे बड़ी ईद जमात इस बार रेड रोड के बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित की गई। वर्षों से रेड रोड पूर्वी भारत की सबसे बड़ी ईद नमाज सभाओं में शामिल रही है, जहां लाखों लोग जुटते थे।
हालांकि इस बार प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी के तहत कोलकाता पुलिस और कलकत्ता खिलाफत कमेटी के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, जिसके बाद ब्रिगेड परेड ग्राउंड को नया स्थल तय किया गया।
प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ब्रिगेड परेड ग्राउंड सेना के अधिकार क्षेत्र में आता है और आयोजन के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी। निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्ण ढंग से नमाज अदा की गई, जबकि रेड रोड पर पहली बार ईद के दिन सामान्य ट्रैफिक चलता दिखाई दिया।
लोगों ने की नई व्यवस्था की सराहना
नमाज अदा करने पहुंचे कई लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नए स्थल पर बेहतर इंतजाम किए गए थे और उन्हें वहां नमाज पढ़कर अच्छा लगा। कुछ लोगों ने कहा कि धार्मिक आयोजन कानून और व्यवस्था का पालन करते हुए भी शांतिपूर्ण तरीके से किए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद को भारतीय होने पर गर्व महसूस करते हैं और कानून का सम्मान करते हैं।
सरकार के निर्देशों के बाद बदली व्यवस्था
राज्य प्रशासन की ओर से पहले ही निर्देश जारी किए गए थे कि सड़कों पर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया था कि लाउडस्पीकर की आवाज धार्मिक परिसरों से बाहर नहीं जानी चाहिए और किसी भी हालत में यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।
यह फैसला लंबे समय से उठ रही उन शिकायतों के बीच आया, जिनमें आम लोगों को होने वाली परेशानी, ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक असुविधा के मुद्दे शामिल थे।
ऐतिहासिक रूप से अहम रही है रेड रोड
इतिहास के अनुसार, ईद की बड़ी जमात पहले शाहिद मीनार मैदान में आयोजित होती थी। वर्ष 1919 में मैदान में जलभराव के बाद इसे रेड रोड स्थानांतरित किया गया था। तब से रेड रोड इस बड़े धार्मिक आयोजन का केंद्र बना रहा। केवल कोरोना काल के दौरान ही इस परंपरा में अस्थायी बदलाव देखने को मिला था।
कानून और आस्था के संतुलन का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में धार्मिक आस्था का सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधा भी उतनी ही जरूरी है।
इस बार पश्चिम बंगाल में ईद का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, सड़कें जाम नहीं हुईं और ट्रैफिक सामान्य बना रहा। इसे प्रशासनिक अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था के संतुलन की एक नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।