पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अस्थिरता के बीच ईरान से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। ईरान की सरकारी मीडिया और शक्तिशाली संस्था Assembly of Experts ने दिवंगत नेता Ali Khamenei के दूसरे बेटे Mojtaba Khamenei को आधिकारिक तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया है।
सरकारी ब्रॉडकास्टर Press TV ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर इसकी घोषणा की। इसे ईरान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और विवादित सत्ता परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब देश की सर्वोच्च सत्ता पिता से पुत्र के हाथों में चली गई है।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने इस घोषणा के साथ ही ईरानी जनता से एकजुट रहने और नए सुप्रीम लीडर को समर्थन देने की अपील भी की है।
मोजतबा खामेनेई कौन हैं?
Mojtaba Khamenei का जन्म 8 सितंबर 1969 को उत्तर-पूर्वी ईरान के शहर Mashhad में हुआ था। वे Ali Khamenei के छह बच्चों में दूसरे नंबर के हैं।
उन्होंने तेहरान के अलावी स्कूल से अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी की। 17 वर्ष की आयु में उन्होंने Iran–Iraq War के दौरान कुछ समय के लिए सेना में भी सेवा दी। यह आठ साल का युद्ध ईरान की सुरक्षा नीति और पश्चिमी देशों के प्रति उसके नजरिए को गहराई से प्रभावित करने वाला साबित हुआ।
1999 में मोजतबा धार्मिक शिक्षा के लिए ईरान के प्रमुख इस्लामी केंद्र Qom चले गए, जहां उन्होंने उन्नत इस्लामिक अध्ययन किया। उसी समय उन्होंने मौलवी का पारंपरिक परिधान धारण करना शुरू किया।
लंबे समय तक उन्हें एक मिड-रैंकिंग मौलवी माना जाता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में कई ईरानी मीडिया संस्थानों और सरकार से जुड़े लोगों ने उन्हें “अयातुल्ला” कहना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उनके नेतृत्व से पहले धार्मिक प्रतिष्ठा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है।
राजनीति में मोजतबा का प्रभाव
मोजतबा खामेनेई पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में तब चर्चा में आए जब 2005 के राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी नेता Mahmoud Ahmadinejad सत्ता में आए।
रिफॉर्मिस्ट नेता Mehdi Karroubi ने आरोप लगाया था कि मोजतबा ने Islamic Revolutionary Guard Corps और Basij से जुड़े नेटवर्क के जरिए चुनाव को प्रभावित किया। इसी तरह के आरोप 2009 के विवादित चुनाव के दौरान भी सामने आए थे, जिसके बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें Green Movement protests in Iran के नाम से जाना गया।
हालांकि मोजतबा ने हमेशा सार्वजनिक रूप से कम प्रोफाइल बनाए रखा, लेकिन उन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता संरचना में एक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता रहा है।
पिता की नीतियों को आगे बढ़ाने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई अपने पिता अली खामेनेई की कट्टरपंथी और सख्त नीतियों को आगे बढ़ा सकते हैं।
हालांकि उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं —
आर्थिक संकट
घरेलू राजनीतिक असंतोष
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध
और पश्चिम एशिया में बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
इन परिस्थितियों में उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक की स्थिरता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी।
सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ीं
ईरान में सत्ता परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में Israel Katz, जो Israel के रक्षा मंत्री हैं, ने चेतावनी दी थी कि अली खामेनेई के बाद आने वाला कोई भी नेता संभावित रूप से “खतरे का निशाना” बन सकता है।
यह बयान ईरान के नए सुप्रीम लीडर के आसपास मौजूद संवेदनशील और अस्थिर सुरक्षा माहौल की ओर इशारा करता है।
मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ेगा असर
मोजतबा खामेनेई का सत्ता में आना ईरान की आंतरिक राजनीति में कट्टरपंथी धड़े की जीत के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पूरा Middle East तनाव और संघर्ष से गुजर रहा है, उनका नेतृत्व क्षेत्रीय राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।
आने वाले समय में यह तय होगा कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान टकराव का रास्ता अपनाता है या कूटनीतिक संतुलन और स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाता है।