नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) – जैन कैलेंडर के आधार पर, नवपद ओली पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। पहला पर्व चैत्र मास में आता है, और दूसरा पर्व आश्विन मास में मनाया जाता है। इन दो महीनों में, यह त्योहार शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि से पूर्णिमा तक मनाया जाता है। इस त्योहार का महत्व जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यधिक उच्च माना जाता है।
नवपद ओली पर्व और नौ सर्वोच्च पद
जैन धर्म में, नौ सर्वोच्च पद हैं, जिनमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र, और सम्यक तप शामिल हैं। नवपद ओली पर्व इन नौ पदों को याद करने के लिए होता है, और इस महत्वपूर्ण त्योहार के दौरान जैन समुदाय के लोग नौ दिनों तक आयंबिल तप का पालन करते हैं।
आयंबिल तप और ओली तप की विशेषता
“आयंबिल” शब्द का अर्थ होता है “समभाव की साधना करना” और “रस का परित्याग करना”। इस प्रकार, आयंबिल तप एक विशेष प्रकार का उपवास है, जिसमें साधक नौ दिनों तक आयंबिल तप का पालन करते हैं।
इस दौरान, उनका भोजन एक बार दिन में खाया जाता है, और वह भोजन बिना नमक, चीनी, तेल, और मसालों के होता है। यह परंपरागत भोजन आयंबिल कहलाता है, और इसमें गेहूं, चावल, चना, मूंग, और उड़द के अनाज को उबालकर तैयार किया जाता है। इसमें सूर्यास्त तक गर्म पानी का सेवन भी शामिल होता है।