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Nation's knowledge and character is formed by conduct - Dr. Ramchandra (Kurukshetra)

राष्ट्र ज्ञान,चरित्र आचार से बनता है -डॉ.रामचन्द्र (कुरुक्षेत्र)

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केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “राष्ट्र आराधन की वैदिक दृष्टि” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। वैदिक प्रवक्ता डॉ. रामचन्द्र (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज के संस्कृत विभागाध्यक्ष) ने कहा कि वेद भारतीय ज्ञान परंपरा के आदि स्रोत हैं।वेद और दर्शन,उपनिषद, वेदांग,उपांग और मनुस्मृति, रामायण तथा महाभारत आदि ग्रंथों में ज्ञान का महासागर छिपा हुआ है।प्राचीन काल में भारत को आर्यावर्त के रूप में संबोधित किया जाता था।

मनुस्मृति आदि सभी प्राचीन ग्रंथ में बहुत बार आर्यावर्त शब्द का प्रयोग आता है।राष्ट्र शब्द संस्कृत की राज् धातु से बनता है जिसका अर्थ होता है सदैव प्रकाशमान।राष्ट्र बड़ी बड़ी अट्टालिकाओं से नहीं बनता है अपितु उसका निर्माण होता है वहां के नागरिकों के ज्ञान,चरित्र एवं आचार परंपरा से।मनुस्मृति में कहा गया है कि पृथ्वी के समस्त देशों के मानव भारत भूमि के ऋषियों से चरित्र की शिक्षा ग्रहण करें।

राष्ट्र आराधन की पहली वैदिक दृष्टि यह है कि वहां के नागरिक अपने देश को प्रथम रखें और उनका संकल्प हो कि उनके किसी भी आचरण से राष्ट्रीय गौरव का हनन न हो।अथर्ववेद में पृथ्वी को मां के रूप में संबोधित किया गया है।जब नागरिक राष्ट्र को केवल भूखंड के रूप में न देखकर मां के रूप में देखेगा तो वह अपने प्रत्येक आचरण से राष्ट्रीय गौरव को बढाने का कार्य करेगा।वैदिक काल में गुरुकुल के आचार्य बाल्यावस्था में ही ब्रहमचारीयों को राष्ट्रीय गौरव से ओतप्रोत कर देते थे।

रामायण में लंका पर विजय के बाद राम यह कहकर सोने की लंका का त्याग कर देते हैं कि जननी एवं जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है और मुझे लंका से कोई भी मोह नहीं है।आज जब बडी संख्या में हमारे देश के युवाओं का पलायन विदेशों की ओर हो रहा है तो निश्चित रूप से यह चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि वेद एवं वैदिक शास्त्रों के स्वाध्याय तथा वैदिक शिक्षा परम्परा को अपना कर ही हम राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्य अतिथि एडवोकेट शशि पाराशर एवं अध्यक्ष सोहन लाल आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए।परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया।राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गायिका प्रवीना ठक्कर,रविन्द्र गुप्ता,रजनी गर्ग,कौशल्या अरोड़ा, कमला हंस,जनक अरोड़ा आदि के मधुर भजन हुए।

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