एक घने जंगल में, पेड़ों की ऊँची डाल पर एक छोटी सी चिड़िया का घोंसला था। उस घोंसले में तीन चि雛 (ch雛 – chicks) थे जो भी उड़ना सीख रहे थे। एक दिन, जब उनकी माँ भोजन की तलाश में गई थी, तभी एक तेज़ आँधी आई। पेड़ हिलने लगा और घोंसला डगमगाने लगा। डर के मारे तीनों चि雛 घोंसले में ही सिकुड़ कर बैठ गए।
अचानक, एक चि雛 हिम्मत करके बोला, “इस तरह से डरकर बैठने से कोई फायदा नहीं है। हमें पढ़ना सीखना ही होगा!”
दूसरा चि雛 बोला, “लेकिन माँ ने तो अभी सिखाया नहीं है। हम गिर जाएंगे तो?”
तीसरा चि雛 भी सहमत हुआ, “हाँ, बहुत ऊंचाई है।”
पहला चि雛 फिर बोला, “माँ ने यह ज़रूर बताया होगा कि उड़ना ही तो हमारा स्वभाव है। आँधी थमेगी नहीं, हमें कोशिश करनी होगी।”
ऐसा कहकर, उसने हिम्मत जुटाई और घोंसले से छलांग लगा दी। थोड़ी देर लड़खड़ाने के बाद, उसके पंखों ने हवा पकड़ ली और वह धीरे-धीरे उड़ने लगा। बाकी दो चि雛 उसे देखकर हैरान रह गए। उन्होंने भी हिम्मत करके छलांग लगाई। थोड़ी परेशानी के बाद, वे भी हवा में उड़ने लगे।
कुछ देर बाद, आँधी थम गई और माँ चिड़िया वापस लौटी। उसे देखकर तीनों चि雛 खुशी से चहचहाने लगे। माँ बहुत खुश हुई और उन्हें बताया कि उन्हें खुद पर गर्व होना चाहिए।
सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किल परिस्थिति में घबराने की बजाय हिम्मत जुटाकर प्रयास करना चाहिए। अपने लक्ष्य को पाने के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए। भले ही थोड़ी सी सफलता हो, लेकिन कोशिश करते रहने से ही सफलता मिलती है।