ये कहानी चीन की हैं। चीन में एक महान फकीर चुआंग चाऊ रहते थे। एक रात को चुआंग चाऊ श्मशान से गुजर रहे थे तो उनका पैर एक खोपड़ी से टकरा गया। दरअसल ये किसी अमीर का श्मशान था। फकीर ये देख घबरा गए और उस खोपड़ी को अपने साथ अपनी झोपडी में ले आए।
उन्होंने उस खोपड़ी को अपने सामने रखा और उस इ हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने लगे। जब फकीर को उनके जानकार लोगो ने देखा तो उन्होंने फकीर से कहा की क्या तुम पागल हो गए हो जो इस खोपड़ी से माफ़ी मांग रहे हो? ये तो एक निर्जीव खोपड़ी हैं।
उन लोगो की बात सुनकर फकीर ने कहा की ये खोपड़ी जिस इंसान की हैं अब हो सकता हैं की वो सिंहासन पर बैठ चुका हो। मैं इसलिए माफ़ी मांग रहा हूँ, क्योंकि अगर आज ये इंसान जीवित होता तो पता नहीं मेरा क्या हाल करता। इसलिए इससे यहां माफ़ी मनगना सही हैं। उसकी ये बात सुनकर सभी हसने लगे।
तब फकीर ने कहा की मैं सोचता हूँ की जब ये इंसान जीवित होगा तो सोचता होगा की मैं एक सिहानसन पर बैठ हूँ। इसके अंदर कितना अभिमान होगा। उस समय इसने ये बिलकुल भी नहीं सोचा होगा की इसकी खोपड़ी एक फकीर के पैरो से ठोकर खाएगी। उस समय में इससे से सब डरते होंगे, परन्तु आज इसकी खोपड़ी ठोकर खाने के बाद उफ़ तक भी नहीं कर पा रही।
फकीर की ये बात सुनकर सभी हैरान हो गए। तब फकीर ने उन लोगो को समझाया की इंसान को किसी भी पद या सिंहासन का मान नहीं करना चाहिए। परन्तु इस संसार में लोगो की अच्छाई को देखने वाले कम और बुराई करने वाले ज्यादा हैं।
परन्तु हमे इस पर दुखी और नाराज नहीं होना चाहिए। बल्कि अपने अंदर एक बार जरूर झांकना चाहिए। हो सकता हैं की हमारे अंदर वो कमी हो। और उस इंसान के कहने मात्र से हम अपनी उस कमी को दूर कर, अपने आपको एक सफल इंसान बना सकते है। सभी लोगो को अपनी गलती का अहसास हो गया और उन्होंने उस फकीर से माफ़ मांगी।