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Monsoon 2026: केरल में मॉनसून की रफ्तार क्यों पड़ी धीमी? समझें चक्रवात का असर

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\भीषण गर्मी और हीटवेव से जूझ रहे देशवासियों के लिए राहत की खबर फिलहाल टलती नजर आ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के केरल पहुंचने में देरी हो सकती है।

पहले अनुमान था कि मॉनसून 26 मई 2026 तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन अब IMD ने अपना पूर्वानुमान अपडेट करते हुए कहा है कि मॉनसून 2 से 4 जून के बीच दस्तक दे सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है मॉनसून?

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मॉनसून केवल मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

देश की कुल सालाना बारिश का करीब 75% हिस्सा मॉनसून से मिलता है।

भारत की लगभग आधी आबादी और बड़ी कार्यशक्ति कृषि पर निर्भर है।

खेती, जल भंडारण और बिजली उत्पादन पर भी मॉनसून का सीधा असर पड़ता है।

ऐसे में मॉनसून में देरी किसानों और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा रही है।

बंगाल की खाड़ी का चक्रवात बना बड़ी वजह

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मॉनसून की रफ्तार धीमी होने के पीछे बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती सिस्टम बड़ी वजह है।

दरअसल, मॉनसून की एक प्रमुख शाखा बंगाल की खाड़ी से उठती है और पूरे भारत में आगे बढ़ती है। लेकिन जब इस क्षेत्र में चक्रवात बनता है, तो वह नमी और हवाओं को अपनी ओर खींच लेता है।

इसके कारण—

मॉनसून को आगे बढ़ाने वाली हवाओं का प्रवाह कमजोर पड़ जाता है।

हवा का पैटर्न बाधित हो जाता है।

मॉनसून को दोबारा व्यवस्थित होने में अधिक समय लगता है।

पहले भी चक्रवात रोक चुके हैं मॉनसून

यह पहली बार नहीं है जब चक्रवात के कारण मॉनसून प्रभावित हुआ हो।

इससे पहले 2013 और 2021 में भी बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातों ने मॉनसून की रफ्तार को धीमा कर दिया था। हालांकि इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा अहम मानी जा रही है क्योंकि मॉनसून के समय से पहले आने की उम्मीद जताई गई थी।

केरल में बारिश के बावजूद मॉनसून घोषित क्यों नहीं?

केरल के कई हिस्सों में फिलहाल अच्छी बारिश हो रही है, लेकिन मौसम विभाग ने इसे अभी “असली मॉनसून” नहीं माना है। इसे तकनीकी तौर पर “प्री-मॉनसून बारिश” कहा जा रहा है।

IMD मॉनसून के आगमन की घोषणा तभी करता है जब कुछ वैज्ञानिक मानक पूरे हों।

मॉनसून घोषित करने के प्रमुख मानक

केरल और लक्षद्वीप के कम से कम 60% मौसम केंद्रों पर लगातार दो दिन तक 2.5 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो।

पश्चिमी हवाओं की गति और गहराई तय मानकों तक पहुंचे।

बादलों की सघनता (OLR) निर्धारित स्तर के अनुरूप हो।

इन सभी शर्तों के पूरा होने के बाद ही मॉनसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा की जाती है।

अल नीनो ने बढ़ाई चिंता

साल 2026 पहले से ही रिकॉर्ड गर्मी और लू के कारण चर्चा में है। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में लगातार भीषण गर्मी पड़ रही है।

इस बीच IMD ने “अल नीनो” के संभावित असर की भी आशंका जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति बनने पर देश के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि जून के पहले सप्ताह में मॉनसून कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और गर्मी से राहत दिलाने में कितना असरदार साबित होता है।

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