पाकिस्तान के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल ही में सिंधु जल संधि को लेकर भारत को धमकी दी थी कि “या तो दरिया में हमारा पानी बहेगा या भारत का खून।” इस बयान ने भारत में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया था। लेकिन अब, बिलावल का सुर पूरी तरह बदल गया है और वे बातचीत की गुहार लगाने लगे हैं।
भारत का सख्त जवाब: अब केवल एक्शन
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का फैसला किया। 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की। भारत ने साफ कर दिया कि अब न कोई बातचीत होगी और न ही कोई रियायत मिलेगी। अब केवल कार्रवाई होगी।
पाकिस्तान को सिंधु जल संधि के निलंबन का डर
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी मिला था। पाकिस्तान की 80% खेती और 30% बिजली परियोजनाएं इसी जल पर निर्भर हैं। पानी के रुकने का सीधा मतलब है पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूटना — और यही डर अब बिलावल भुट्टो के बदले तेवरों की वजह बना है।
बिलावल भुट्टो ने मांगी बातचीत
धमकी देने के 24 घंटे के भीतर ही बिलावल भुट्टो ने नरमी दिखाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने भारत को बातचीत का ऑफर भेजा था, लेकिन भारत ने उसे खारिज कर दिया। एआरवा न्यूज से बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि कई देश भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करना चाहते हैं। यानी जो कल खून बहाने की बात कर रहे थे, आज हाथ जोड़कर बातचीत की गुहार लगा रहे हैं।
मोदी सरकार का सख्त संदेश: अब सिर्फ एक्शन
भारत ने पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया है कि अब कोई बातचीत नहीं होगी। पाकिस्तान को उसकी हरकतों का जवाब अब उसी की भाषा में दिया जाएगा — एक्शन की भाषा में। यह वही पाकिस्तान है जो बार-बार बातचीत का दिखावा करता है, फिर धोखा देता है और हमले करवाता है, और बाद में माफी मांगने की कोशिश करता है।