बिहार में एनडीए की भारी जीत के बाद नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नई जुगलबंदी और नए समीकरणों की झलक देखने को मिली।
विपक्ष जहां मंथन में जुटा है, वहीं सत्ता पक्ष में उत्साह और सामंजस्य का संदेश सामने आया।
मोदी–नीतीश की बॉडी लैंग्वेज बनी दिन का सबसे बड़ा संदेश
सुबह 11:30 बजे नीतीश कुमार ने राजभवन में शपथ ली। कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री मोदी ने X पर उन्हें बधाई देते हुए उन्हें “अनुभवी प्रशासक” बताया और शुभकामनाएँ दीं।
गांधी मैदान में हुए सार्वजनिक समारोह में दोनों नेताओं का गर्मजोशी भरा मिलन पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी हाइलाइट बन गया।
पीएम मोदी पहली बार नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण में शामिल हुए और स्टेज पर उनकी सहज मौजूदगी ने हफ्तों से चल रही राजनीति अटकलों पर विराम लगा दिया।
गांधी मैदान में भावुक क्षण
स्टेज पर PM मोदी ने मंत्रियों और विधायकों से गर्मजोशी से हाथ मिलाया, भीड़ की ओर ‘गमछा’ लहराकर अभिवादन किया और पूरा माहौल उत्साह से भर गया। बिहार में उनकी लोकप्रियता इस पल में साफ झलकी।
नीतीश कुमार भी प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए भावुक नजर आए। दोनों के बीच सहज बातचीत और मुस्कुराहटों ने राजनीतिक हलकों में कई संकेत छोड़े।
सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की हुई जब दोनों नेताओं ने मंच से एक साथ हाथ उठाकर जनता का अभिवादन किया—यह तस्वीर 2010 की याद दिला गई।
2010 की तस्वीर का बदला माहौल
2010 में लुधियाना रैली में मोदी ने नीतीश का हाथ उठाया था, जिसे नीतीश ने बाद में नापसंदगी जताई थी।
उसके बाद रिश्ते इतने बिगड़े कि BJP के साथ खाई गहरी हो गई थी।
लेकिन गुरुवार को वही दृश्य बिल्कुल अलग रंग में लौटा—दोनों नेता सहज, आत्मविश्वासी और सहयोगी रूप में दिखे।
यह संकेत था कि केंद्र और बिहार के बीच संबंध अब एक स्थिर और मजबूत फेज़ में प्रवेश कर चुके हैं।
नए मंत्रिमंडल की झलक
नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
कई वरिष्ठ नेताओं—विजय कुमार चौधरी, मंगल पांडे, श्रवण कुमार, बिजेन्द्र यादव आदि—को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
समारोह के बाद PM मोदी ने दोनों डिप्टी CMs से गर्मजोशी से हाथ मिलाकर बधाई दी।
संकेत: पुरानी कड़वाहट खत्म, स्थिर गठबंधन की शुरुआत
शपथ ग्रहण भले ही औपचारिकता थी, लेकिन मंच की तस्वीरें और नेताओं की बॉडी लैंग्वेज ने साफ बताया कि:
बीते वर्षों की तल्खियाँ पीछे छूट चुकी हैं
NDA में भरोसे का नया अध्याय शुरू हुआ है
केंद्र–राज्य तालमेल अब अधिक स्थिर दिख रहा है
राजनीति के जानकारों के अनुसार, यह केवल समारोह नहीं था—यह नए राजनीतिक समीकरण की औपचारिक घोषणा जैसा था।