डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका में लौटने के साथ ही कनाडा में सियासी भूचाल आ गया। हालात ऐसे बन गए कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को इस्तीफा देना पड़ा और नए प्रधानमंत्री की घोषणा हो गई। नए प्रधानमंत्री ने आते ही आम चुनावों का ऐलान कर दिया, जो 24 अप्रैल को होने वाले हैं।
लेकिन चुनावों की घोषणा के साथ ही कनाडा एक बार फिर अपने पुराने आरोपों के राग पर लौट आया। इस बार भी कनाडा ने चीन और भारत पर उसके चुनावों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं।
आम चुनाव में भारत कर सकता है हस्तक्षेप?
कनाडा की खुफिया एजेंसी की उप निदेशक वनेसा लॉयड ने दावा किया है कि भारत कनाडा के आम चुनावों में हस्तक्षेप कर सकता है।
वनेसा का कहना है कि भारत के पास न केवल मंशा बल्कि क्षमता भी है कि वह कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सके।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान भी कनाडा की राजनीति में दखल दे सकता है।
2022 के कंजर्वेटिव पार्टी चुनावों में भी कुछ देशों के धन जुटाने और समर्थन दिलाने में भूमिका होने की बात कही गई थी।
चीन एआई और सोशल मीडिया से खेल रहा गेम?
कनाडा की खुफिया एजेंसी के अनुसार:
चीन एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से अपनी पसंद का नैरेटिव बना रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर चीन चुनावों को प्रभावित कर सकता है।
रूस भी अपने प्रचार तंत्र और ‘बॉट आर्मी’ से कनाडा के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
क्या भारत पर लगाए गए आरोप सही हैं?
भारत पहले भी कनाडा के इन आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बता चुका है। ट्रूडो सरकार के दौरान भारत-कनाडा संबंधों में खटास आ गई थी, लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि नए प्रधानमंत्री के आने के बाद भी कनाडा वही पुराना खेल क्यों खेल रहा है?
क्या वाकई मोदी और जिनपिंग मिलकर कोई बड़ा गेम प्लान कर रहे हैं या कनाडा अपनी ही अंदरूनी राजनीति में उलझा हुआ है?