नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) – भारत में निजी एफएम चैनलों की विशेषता है, जिनकी संख्या कई भारतीय भाषाओं में 380 से भी अधिक है और जिनकी मौजूदगी देश के अधिकांश राज्यों में है। ये चैनल सरकार की विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों को लोगों के पास पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बने हैं, ताकि देश के नागरिकों को विभिन्न योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों से लाभ उठाने में सहायक हो सकें।
नई दरों की मंजूरी
सितंबर, 2023 को मंत्रालय ने सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए निजी एफएम रेडियो स्टेशनों पर जारी किए जाने वाले विज्ञापनों की नई दरों को मंजूरी दी है, जो इसके द्वारा गठित दर संरचना समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य निजी एफएम रेडियो स्टेशनों के लिए एक निष्पक्ष और सतत मूल्य निर्धारण ढांचा सुनिश्चित करने के लिए है, जो मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों का महत्वपूर्ण प्राप्ति है।
बेस रेट में वृद्धि
दिसंबर 2015 से लेकर मार्च 2023 तक की अवधि के लिए मंत्रालय ने अनुमोदित नई दरों में बढ़ी हुई लागत को ध्यान में रखते हुए बेस रेट में 43 प्रतिशत की वृद्धि की है। इसके साथ ही एफएम रेडियो विज्ञापन के लिए सकल बेस रेट 52 रुपये से बढ़कर 74 रुपये प्रति दस सेकेंड हो गई है। यह समायोजन वर्तमान बाजार दरों के साथ समानता बनाए रखने का उद्देश्य रखता है। इस वृद्धि से देश भर में मौजूदा समय में चालू या कार्यरत 400 से भी अधिक सामुदायिक रेडियो स्टेशन भी लाभान्वित होंगे।
मूल्य निर्धारण फॉर्मूले का उपयोग
बेस रेट को बढ़ाने के साथ-साथ मंत्रालय ने शहरवार दरों की गणना के लिए मौजूदा मूल्य निर्धारण फॉर्मूले को जारी रखने का भी निर्णय लिया है। मूल्य निर्धारण फॉर्मूले में शहर की आबादी और श्रोताओं की कुल संख्या से जुड़े डेटा जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखा गया है, जो वर्ष 2019 के इंडिया रीडरशिप सर्वे से लिया गया है। इस फॉर्मूले के आधार पर बढ़े हुए बेस रेट से लगभग सभी निजी एफएम रेडियो स्टेशन नई अनुशंसित दरों से लाभान्वित होंगे, जो काफी हद तक उनके श्रोताओं की कुल संख्या पर निर्भर करेंगी और जो एफएम स्टेशनों और सीबीसी के ग्राहकों दोनों के लिए ही उचित मूल्य प्रदान करेंगी।
निजी एफएम रेडियो स्टेशनों के लिए दर संरचना समिति
निजी एफएम रेडियो स्टेशनों के लिए दर संरचना समिति का गठन पिछले साल मंत्रालय द्वारा नई दरों का आकलन और सिफारिश करने के लिए किया गया था, जिन्हें आखिरी बार वर्ष 2015 में संशोधित किया गया था। इस समिति ने एसोसिएशन ऑफ रेडियो ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं से इस बारे में आवश्यक जानकारियां प्राप्त करने के अलावा उद्योग विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ कई दौर की बैठकें करने के बाद ही अपनी सिफारिशें पेश कीं।