पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का कश्मीर दौरा योजनाबद्ध और जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि देश में मुसलमानों की राय का कोई महत्व नहीं है।
महबूबा मुफ्ती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन का दौरा मुस्लिम समुदाय के हाशिए पर होने और उनकी शक्तिहीनता का सार्वजनिक उत्सव जैसा लगा।
‘वक्फ संशोधन विधेयक के बाद लिया गया रणनीतिक फैसला’
अपने पोस्ट में पीडीपी प्रमुख ने यह भी लिखा कि संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित कराने के तुरंत बाद मंत्री किरेन रिजिजू ने कश्मीर का दौरा करने का निर्णय लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के एकमात्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र के मुख्यमंत्री द्वारा उनका भव्य स्वागत इस बात का संकेत था कि जब राज्य का नेता केंद्र के साथ खड़ा हो, तब देश के 24 करोड़ मुसलमानों की बात को महत्व नहीं दिया जाता।
‘मुख्यमंत्री के कदम ने समुदाय में असहायता की भावना को बढ़ाया’
महबूबा मुफ्ती ने अपने एक अन्य पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कार्यों ने न केवल मुस्लिम समुदाय के भीतर अलगाव और असहायता की भावना को गहरा किया है, बल्कि एकतरफा निर्णय को वैधता भी दी है जिसे मुस्लिम हितों की उपेक्षा माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के समापन के साथ ही सत्तारूढ़ गठबंधन को इस राजनीतिक मुद्दे को और लंबा खींचने के बजाय इस विधेयक को अस्वीकार करने के लिए प्रस्ताव पारित करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ट्यूलिप गार्डन में दिखा ‘सद्भाव’ का दृश्य
7 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन में एक साथ सुबह की सैर की। इसके अलावा रिजिजू ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से भी मुलाकात की।