ईरान में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है। इन प्रदर्शनों की शुरुआत राजधानी तेहरान से हुई, जो बाद में देश के अन्य हिस्सों में फैल गए।
छात्रों की भागीदारी से तेज हुआ आंदोलन
मंगलवार को कम से कम 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों के विरोध में शामिल होने के बाद प्रदर्शन और तेज हो गए। युवाओं की भागीदारी से आंदोलन को नया बल मिला है और यह तेजी से व्यापक रूप लेता जा रहा है।
महंगाई और आर्थिक मंदी बनी विरोध की वजह
इन विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह आर्थिक मंदी और रिकॉर्ड तोड़ महंगाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में महंगाई दर बढ़कर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। बढ़ती कीमतों और बेरोज़गारी से आम जनता में गहरा असंतोष है।
प्रांतों तक फैले प्रदर्शन, झड़पों में मौतें
बृहस्पतिवार तक प्रदर्शन कई प्रांतों में फैल गए। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में सात लोगों की जान चली गई। अधिकारियों के अनुसार, राजधानी तेहरान में विरोध की रफ्तार भले ही कुछ धीमी पड़ी हो, लेकिन अन्य इलाकों में प्रदर्शन और उग्र हो गए हैं।
चार शहरों में हिंसा, लूर समुदाय बहुल इलाके प्रभावित
बुधवार को दो और बृहस्पतिवार को पांच लोगों की मौत चार अलग-अलग शहरों में हुई। इन शहरों में लूर जातीय समुदाय की बहुलता है। यह आंदोलन 2022 के बाद ईरान का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।
लोरेस्टान में सबसे ज्यादा हिंसा
आर्थिक मुद्दों को लेकर सबसे ज्यादा हिंसा लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सड़कों पर जलती वस्तुएं, गोलियों की आवाजें और “बेशर्म! बेशर्म!” के नारे सुनाई दे रहे हैं।
अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार, यहां तीन लोगों की मौत हुई है।
2022 के प्रदर्शनों की याद
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा विरोध प्रदर्शन 2022 में हुए आंदोलनों से मिलते-जुलते हैं, जब पुलिस हिरासत में महसा अमिनी की मौत के बाद देशभर में व्यापक प्रदर्शन हुए थे।
सरकार का रुख: बातचीत की पेशकश, सख्ती की चेतावनी
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के नेतृत्व वाली नागरिक सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की इच्छा जताई है। सरकारी टीवी पर प्रसारित कार्यक्रम में उन्होंने कहा,
“इस्लामी नजरिए से, अगर हम लोगों की रोज़ी-रोटी का मुद्दा हल नहीं कर पाए, तो हम नरक में जाएंगे।”
कमजोर रियाल ने बढ़ाई मुश्किलें
हालांकि राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि सरकार के पास विकल्प सीमित हैं। ईरान की मुद्रा रियाल बेहद कमजोर हो चुकी है और फिलहाल एक डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल तक पहुंच गई है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन वैध, हिंसा पर सख्त रुख
ईरान के प्रॉसिक्यूटर जनरल ने कहा है कि शांतिपूर्ण आर्थिक विरोध प्रदर्शन वैध हैं, लेकिन यदि किसी ने असुरक्षा फैलाने की कोशिश की तो उसे “निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।