23 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनकी पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मां स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता।
जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी जोत जलाता रहूं मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहूं मैं॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कहीं पहाड़ों पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाएं तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करें पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आई।
भक्त की आस पुजाने आई॥
मां स्कंदमाता का भजन
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदा माता महारानी।
इसका ममता रूप है, ध्याएं ज्ञानी-ध्यानी॥
कार्तिकेय को गोद में लेकर करती अनोखा प्यार।
अपनी शक्ति देकर करती जीवन में संचार॥
भूरे सिंह पर बैठकर मंद-मंद मुस्काए।
कमल का आसन साथ में सुंदर रूप सजाए॥
आशीर्वाद देती हाथ से, मन में भरे उमंग।
कीर्तन करता जो भी, छाए नाम का रंग॥
जैसे रूठे बालक की सुनती आप पुकार।
मुझको भी वह प्यार दो, मत करना इनकार॥
नवरात्रों की मां, कृपा कर दो मां।
नवरात्रों की मां, कृपा कर दो मां॥
जय मां स्कंदमाता।
जय मां स्कंदमाता॥