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लॉरेंस बिश्नोई वीडियो विवाद: X बनाम पंजाब पुलिस, मामला हाई कोर्ट पहुंचा

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) और पंजाब पुलिस के बीच कंटेंट हटाने को लेकर विवाद अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। यह मामला पिछले तीन महीनों से जारी गतिरोध के बाद अदालत में पहुंचा है, जिसमें पुलिस ने कथित तौर पर अपराध का महिमामंडन करने वाले वीडियो हटाने की मांग की है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

यह विवाद 31 जनवरी 2026 को शुरू हुआ, जब एसएएस नगर (मोहाली) की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 29 जनवरी की एफआईआर से जुड़े मामले पर सुनवाई की।

एफआईआर में अज्ञात लोगों पर “मनगढ़ंत गलत सूचना” फैलाने का आरोप लगाया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार की एक नई नीति से पंजाब में एक लाख युवाओं की हत्या हो जाएगी।

पंजाब पुलिस ने X को कई वीडियो हटाने के निर्देश दिए, जिनमें—

न्यूज चैनलों के क्लिप

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और पाकिस्तानी गैंगस्टर भट्टी के बीच कथित वीडियो कॉल

शामिल थे। यह कॉल गुजरात की जेल से जुड़ा बताया गया, जो पंजाब पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है।

अदालत की अहम टिप्पणी

मजिस्ट्रेट अदालत ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए व्यापक प्रतिबंध पर चिंता जताई।

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मनप्रीत कौर ने कहा—

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी है

कई वीडियो केवल जनता की प्रतिक्रियाओं को दिखाते हैं

ऐसे कंटेंट पर पूरी तरह रोक लगाना गलत होगा

अदालत ने केवल उन वीडियो को हटाने का निर्देश दिया, जिनमें “एक लाख युवाओं” वाली भ्रामक जानकारी दी गई थी।

पुलिस की सख्ती और नोटिस

इसके बावजूद पंजाब पुलिस ने 16 फरवरी और 10 मार्च को X को कारण बताओ नोटिस जारी कर 22 और पोस्ट हटाने को कहा।

IT Act की धारा 79(1) के तहत “सेफ हार्बर” खत्म करने की चेतावनी

धारा 84B के तहत कार्रवाई की धमकी

BNSS की धारा 35(3) के तहत X के एक कर्मचारी को गिरफ्तारी पूर्व नोटिस

X का पक्ष

X ने पुलिस के दावों का खंडन करते हुए कहा—

22 में से 7 पोस्ट प्लेटफॉर्म पर मौजूद ही नहीं थे

बाकी 15 पोस्ट प्रतिष्ठित मीडिया और पत्रकारों की रिपोर्टिंग थे

ये पोस्ट न तो अपराध का महिमामंडन करते हैं और न ही अदालत के आदेश का उल्लंघन

कंपनी का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई अदालत के सीमित आदेश से आगे बढ़कर है।

यह मामला अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कानून व्यवस्था के बीच टकराव का बड़ा उदाहरण बन गया है। हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद ही साफ होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और पुलिस की शक्तियों की सीमा क्या होगी।

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