माता लक्ष्मी और भगवान नारायण की पूजा हिंदू धर्म में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक मानी जाती है। भगवान विष्णु जगत के पालनहार हैं और माता लक्ष्मी उनकी अर्धांगिनी के रूप में धन, वैभव और कृपा प्रदान करती हैं। यह भजन प्रभु की महिमा का सुंदर वर्णन करता है।
विष्णु जी का भजन
मुखड़ा
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
वो क्षीर सागर में सोते मिलेंगे
अंतरा 1: माता लक्ष्मी का सौभाग्य
देखो लक्ष्मी के भाग खुल गए हैं
उनको विष्णुपति मिल गए हैं
जरा बैकुंठ में जाकर के देखो
वह चक्र चलाते मिलेंगे
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
अंतरा 2: माता सरस्वती की महिमा
देखो सरस्वती के भाग खुल गए हैं
उन्हें ब्रह्मा पति मिल गए हैं
जरा बैकुंठ में जाकर के देखो
वह तो वेद पढ़ाते मिलेंगे
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
अंतरा 3: माता पार्वती और भगवान शिव
देखो गौरा के भाग खुल गए हैं
उन्हें भोला पति मिल गए हैं
जरा कैलाश में जाकर के देखो
वह तो डमरू बजाते मिलेंगे
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
अंतरा 4: माता सीता और भगवान श्रीराम
देखो सीता के भाग खुल गए हैं
उन्हें रामा पति मिल गए हैं
जरा अयोध्या में जाकर के देखो
वह तो धनुष चलाते मिलेंगे
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
अंतरा 5: राधा रानी और श्रीकृष्ण
देखो राधा के भाग खुल गए हैं
उन्हें कान्हा पति मिल गए हैं
जरा मथुरा में जाकर के देखो
वह तो बंसी बजाते मिलेंगे
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
समापन
लक्ष्मी के पति जग के स्वामी है
वो क्षीर सागर में सोते मिलेंगे