अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्वतंत्रता दिवस पर कहा कि राज्य सभी हरित ऊर्जा परियोजनाओं को गति देने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के जरिए उन्हें आगे बढ़ाने के मिशन पर है। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित अरुणाचल का लक्ष्य रखते हुए हरित ऊर्जा को प्राथमिकता बताया।
प्राकृतिक संसाधनों से ऊर्जा क्रांति
खांडू ने कहा कि अरुणाचल बेजोड़ प्राकृतिक क्षमता के साथ भारत का हरित ऊर्जा केंद्र बन रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ ग्रेफाइट, चूना पत्थर और डोलोमाइट जैसे खनिज संसाधन आने वाले समय में सौर पैनल, बैटरियों और इलेक्ट्रिक वाहनों को नई गति देंगे।
प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ
सुबनसिरी लोअर परियोजना (2000 मेगावाट): मई 2026 तक पूरी होगी।
दिबांग बहुउद्देशीय परियोजना (2880 मेगावाट): फरवरी 2032 तक पूरी होने की राह पर।
राज्य सरकार ने 2025 से 2035 को “जलविद्युत दशक” घोषित किया है। अगले तीन वर्षों में ही 2 लाख करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं पर काम शुरू होगा, जिससे 19 गीगावाट क्षमता बढ़ेगी।
ऊर्जा से सशक्तिकरण
खांडू ने बताया कि ये परियोजनाएं सिर्फ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम भी हैं।
सालाना 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की मुफ्त बिजली
750 करोड़ रुपये स्थानीय क्षेत्र विकास को
2,000 करोड़ रुपये लाभांश सीधे राज्य को
30,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर
रणनीतिक महत्व और पर्यावरणीय योगदान
सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMPP) को जल और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए खांडू ने कहा कि इसका विरोध आदि समुदाय कर रहा है। उन्होंने बताया कि अरुणाचल ने 2023-24 में ही 16,326 कार्बन क्रेडिट जारी कर दिए हैं और 2024-25 में अतिरिक्त 7,275 कार्बन क्रेडिट की मंजूरी अंतिम चरण में है। प्रत्येक कार्बन क्रेडिट 1,000 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी का प्रतीक है।
यह दिखाता है कि अरुणाचल प्रदेश न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में ठोस योगदान दे रहा है।