कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण, भाजपा सरकार द्वारा जनता को गुमराह करने की एक रणनीति है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठा रही है।
कन्हैया ने अमित शाह के दावे को खारिज किया
कन्हैया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसे “कूटनीतिक सफलता” बताए जाने के दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “जब सरकार के पास बताने के लिए कोई असली उपलब्धि नहीं होती, तब वो पुराने मामलों को चुनावी हथियार बनाकर जनता को भ्रमित करने लगती है।”
वक्फ विधेयक और अनुच्छेद 370 का उदाहरण दिया
कन्हैया कुमार ने आगे कहा, “वक्फ विधेयक को लेकर सरकार कह रही है कि यह मुसलमानों के हित में है, जबकि यही सरकार लोगों को छत पर नमाज पढ़ने की भी अनुमति नहीं देती।” उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भाजपा के वादों का भी जिक्र किया और पूछा कि अब तक कितने लोगों ने कश्मीर में जमीन खरीदी है?
प्रियंका चतुर्वेदी का पलटवार: बयान वापस लें कन्हैया
शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कन्हैया कुमार की टिप्पणी को “दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक” बताया। उन्होंने राणा के प्रत्यर्पण को देश के लिए “बड़ी उपलब्धि” बताया और कन्हैया को तुरंत अपना बयान वापस लेने की सलाह दी।
“राणा को मिले सार्वजनिक रूप से फांसी”
प्रियंका ने कहा, “तहव्वुर राणा को भारत वापस लाने का निर्णय स्वागत योग्य है। उसे सार्वजनिक चौराहे पर फांसी दी जानी चाहिए ताकि यह आतंकियों के लिए एक संदेश बने।”
हेडली के प्रत्यर्पण की भी मांग
उन्होंने कहा कि तहव्वुर राणा के बाद सरकार को डेविड कोलमैन हेडली के प्रत्यर्पण की भी कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि 26/11 हमलों में अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे। ऐसे में अमेरिका को सहयोग करना चाहिए।