भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिस बेबाक और ठोस अंदाज में भारत की विदेश नीति का पक्ष रखा, उसने यह साफ कर दिया है कि नया भारत अब किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। अब देश अपने हितों के लिए संतुलित और रणनीतिक तरीके से हर मोर्चे पर आगे बढ़ रहा है।
बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में जयशंकर का बयान भारत की बदलती सामरिक सोच का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
इज़राइल के साथ मजबूत साझेदारी
जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि इज़राइल ने सैन्य संघर्षों के दौरान भारत की महत्वपूर्ण मदद की है और वह रक्षा प्रौद्योगिकी का भरोसेमंद साझेदार रहा है।
यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि पहले इस तरह के सहयोग को खुलकर स्वीकार करने से बचा जाता था।
अमेरिका और तकनीकी सहयोग
विपक्ष द्वारा अमेरिका और इज़राइल के साथ भारत की नजदीकियों पर सवाल उठाए जाने पर जयशंकर ने तथ्यों के साथ जवाब दिया।
उन्होंने बताया कि:
अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है
उच्च तकनीक का बड़ा स्रोत है
रणनीतिक सहयोग में अहम भूमिका निभाता है
ईरान के साथ संतुलित रिश्ते
भारत ने केवल एक पक्ष नहीं, बल्कि ईरान के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत बनाए रखे हैं।
जयशंकर ने जानकारी दी कि:
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से चार भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी
पांच अन्य जहाज भी मार्ग में हैं
यह दर्शाता है कि संकट के समय भी भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यहां से भारतीय जहाजों का सुरक्षित गुजरना भारत की रणनीतिक सफलता को दिखाता है।
संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट रुख
जयशंकर ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर चुप्पी साधी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने समय पर शोक संवेदना व्यक्त की और आवश्यक कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी की।
खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा
भारत ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
सरकार ने संतुलन बनाए रखते हुए न तो किसी एक पक्ष का समर्थन किया और न ही किसी को नजरअंदाज किया।
समुद्री रणनीति में मजबूती
भारत की समुद्री ताकत भी इस दौरान उभरकर सामने आई। ईरानी नौसैनिक जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर सुरक्षित ठिकाना देना यह दिखाता है कि भारत समुद्री मोर्चे पर भी सक्रिय और सक्षम है।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
जयशंकर की फ्रांस यात्रा, जहां वह जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हो रहे हैं, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। यह मंच भारत को नए अंतरराष्ट्रीय समीकरण बनाने का अवसर देगा।
रणनीतिक संतुलन की मिसाल
रणनीतिक दृष्टि से भारत ने एक साथ तीन बड़े शक्ति केंद्रों—अमेरिका, इज़राइल और ईरान—के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं।
यह संतुलन ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है।
आत्मविश्वासी भारत की कूटनीति
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भारत अब वैश्विक राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
भारत अपने हितों को सर्वोपरि रख रहा है
संतुलित लेकिन सख्त रुख अपना रहा है
वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है
यह नया भारत है—जो न दबाव में आता है, न भ्रम में पड़ता है, बल्कि हर कदम सोच-समझकर उठाता है।