अगर आप अक्सर हवाई सफर करते हैं, तो यह खबर आपको चिंतित कर सकती है। भारत के आसमान में उड़ने वाला हर दूसरा विमान तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट नहीं पाया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने भारतीय एयरलाइंस की सुरक्षा और मेंटेनेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधे विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के विमान बेड़े में शामिल लगभग 50 प्रतिशत विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां (Recurring Snags) सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लगातार खराबियां किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
एयर इंडिया ग्रुप की स्थिति सबसे गंभीर
इन आंकड़ों में सबसे चिंताजनक स्थिति एयर इंडिया ग्रुप की सामने आई है।
सरकार के मुताबिक, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 72 प्रतिशत विमानों में बार-बार तकनीकी समस्याएं दर्ज की गईं।
सरकार ने लोकसभा में क्या बताया?
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि:
जनवरी से पिछले वर्ष तक 6 शेड्यूल्ड एयरलाइंस के 754 विमानों का विश्लेषण किया गया
इनमें से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई
इंडिगो के सबसे ज्यादा विमानों की जांच
मंत्री ने बताया कि:
इंडिगो के 405 विमानों की समीक्षा की गई
इनमें से 148 विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं
हालांकि, अनुपात के लिहाज से इंडिगो की स्थिति एयर इंडिया से बेहतर रही।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का आंकड़ा
सरकारी डेटा के अनुसार:
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 267 विमानों की जांच की गई
इनमें से 191 विमानों में बार-बार खराबी पाई गई
विस्तार से देखें तो:
एयर इंडिया के 166 में से 137 विमान प्रभावित
एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 में से 54 विमान प्रभावित पाए गए
अन्य एयरलाइंस की स्थिति
अन्य एयरलाइंस भी इस सूची में शामिल रहीं:
स्पाइसजेट: 43 में से 16 विमानों में खराबी
अकासा एयर: 32 में से 14 विमानों में तकनीकी समस्याएं
एयर इंडिया का पक्ष क्या है?
इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन ने अत्यधिक सावधानी के तहत पूरे बेड़े की व्यापक जांच कराई है।
उन्होंने कहा कि इसी कारण दर्ज की गई खराबियों की संख्या अधिक दिखाई दे रही है।
क्या ये खराबियां उड़ान सुरक्षा से जुड़ी हैं?
एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि:
अधिकतर खराबियां कम प्राथमिकता वाली श्रेणी (Category D) में आती हैं
इनमें सीट, ट्रे टेबल, इन-फ्लाइट स्क्रीन जैसी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं
ये खराबियां विमान की उड़ान सुरक्षा से संबंधित नहीं हैं
DGCA ने बढ़ाई निगरानी
एयरलाइंस ऑडिट के साथ-साथ विमानन नियामक DGCA ने भी निगरानी सख्त की है।
पिछले साल DGCA ने:
3,890 सर्विलांस इंस्पेक्शन
56 रेगुलेटरी ऑडिट
84 विदेशी विमानों की SOFA जांच
492 रैंप इंस्पेक्शन
बिना सूचना जांच और नाइट इंस्पेक्शन
इसके अलावा DGCA ने:
874 स्पॉट चेक
550 नाइट इंस्पेक्शन
भी किए, ताकि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
DGCA में स्टाफ बढ़ाने की तैयारी
मंत्री ने बताया कि 2022 में DGCA में 637 स्वीकृत तकनीकी पद थे।
रीस्ट्रक्चरिंग के बाद यह संख्या बढ़ाकर 1,063 पद कर दी गई है, ताकि निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जा सके।