प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में मनाया। रामकृष्ण बीच से भोगापुरम तक लगभग 26 किलोमीटर की दूरी में फैले कार्यक्रम में करीब 3 लाख लोगों ने सामूहिक योग सत्र में भाग लिया।
थीम: “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग”
21 जून 2025 को मनाया गया यह 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” की थीम पर आधारित था। 2015 में भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद से यह दिन हर साल वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है।
पीएम मोदी का संदेश: योग जोड़ता है दुनिया को
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:“योग हमें दुनिया को जोड़ने का संदेश देता है। यह न सीमाओं से बंधा है, न उम्र, पृष्ठभूमि या क्षमता से।”उन्होंने बताया कि जब भारत ने 21 जून को योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव UN में रखा था, तो 175 देशों ने इसका समर्थन किया था। आज योग, सिडनी ओपेरा हाउस से लेकर एवरेस्ट और समुद्रों तक, हर स्थान पर अपनाया जा चुका है।
योग 2.0 की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि“दुनिया इस समय अनेक प्रकार के तनावों से गुजर रही है। मेरा अनुरोध है कि इस योग दिवस को ‘मानवता के लिए योग 2.0’ की शुरुआत माना जाए, जहां आंतरिक शांति ही वैश्विक नीति बन जाए।”
“मैं” से “हम” की ओर ले जाता है योग
मोदी ने कहा कि योग एक व्यक्तिगत अनुशासन होने के साथ-साथ एक ऐसी प्रणाली है जो व्यक्ति को “मैं” से “हम” की ओर ले जाती है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आम लोगों के साथ योग अभ्यास भी किया।
मुख्यमंत्री नायडू का योगदान पर आभार
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी इस आयोजन को संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए कहा:“मोदी जी ने योग को भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाया है। आज योग एक वैश्विक कल्याण आंदोलन बन चुका है।”नायडू ने जानकारी दी कि 175 से अधिक देशों में, 12 लाख स्थानों पर, 10 करोड़ से अधिक लोगों ने इस दिन योग किया।