नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) – हकलाना एक बोलने से जुड़ा विकार है। हर साल 22 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य लोगों को इस विकार के बारे में जागरूक करना है। अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस सबसे पहले 1998 में नामित किया गया था। हर साल इसे एक थीम के साथ मनाया जाता है। इस बार इस दिन को ‘One Size Does Not Fit All’ थीम के साथ मनाया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं इस विकार के बारे में।
जल्दी देखभाल
बच्चों में हकलाहट की पहचान और उससे निपटना बहुत जरूरी होता है। जितनी जल्दी इस ओर ध्यान दिया जाएगा, बच्चे में इसकी स्थिति बिगड़ने से रोकने या इसे दूर करने की संभावना भी ज्यादा होगी।
कुछ लोगों को बिहेवियरल थेरेपी जैसे – कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) या डिसेंसिटाइजेशन तकनीकों से फायदा हो सकता है और हकलाहट के कारण के रूप में एंजाइटी को कम किया जा सकता है। इससे हालत सुधर सकती है।हेल्प ग्रुप्स
सहयोगी समूहों में शामिल होना या काउंसलिंग की मदद लेना भी हकलाहट से जुड़े भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं से निपटने में मदद कर सकता है। ये समूह अनुभव साझा करने और दूसरों से सीखने के लिए सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराते हैं।
दवाइयां
दवाइयों का प्रयोग सीधे तौर पर हकलाहट के इलाज के लिए नहीं किया जाता, बल्कि कुछ मामलों में एंजाइटी या डिप्रेशन को दूर करने के लिए इनका सहारा लेना पड़ सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे – डिलेड ऑडिट्री फीडबैक (डीएएफ) उपकरण या स्पीच रिस्ट्रक्चरिंग सॉफ्टवेयर का प्रयोग हकलाहट दूर करने और बेहतर साफ बोली के लिए किया जा सकता है।
निरंतर अभ्यास
हकलाहट दूर करने के लिए आमतौर पर निरंतर अभ्यास और धैर्य की जरूरत होती है। साथ ही, उन स्पीच-तकनीकों और तरीकों का निरंतर प्रयोग करना होगा, जिन्हें बोलने की क्षमता सुधारने के लिए प्रयोग की गई थेरेपी में समझाया गया था।
जागरूकता और अपनाना
हकलाहट को स्वीकार करना और उसके बारे में जागरूक रहना मददगार हो सकता है। हकलाहट से किसी की बुद्धिमता या क्षमताओं का पता नहीं चलता। कई सफल लोगों ने अपनी हकलाहट पर अच्छी तरह काबू पाया है।