प्रयोगशाला परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि इंदौर में फैले डायरिया के प्रकोप की वजह दूषित पेयजल था। इस प्रकोप में अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग इसकी चपेट में आए हैं। ये खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब इंदौर लगातार 8 वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है।
पाइपलाइन लीकेज से फैला संक्रमण
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसनी ने बताया कि एक मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई लैब रिपोर्ट में भागीरथपुरा इलाके में पेयजल पाइपलाइन में रिसाव की पुष्टि हुई है। इसी रिसाव के कारण पानी दूषित हुआ और बीमारी फैली। हालांकि रिपोर्ट के विस्तृत तकनीकी निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
शौचालय के ऊपर से गुजर रही थी मुख्य पाइपलाइन
अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास शौचालय के ऊपर से गुजर रही मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज पाया गया। इसी कारण इलाके में सप्लाई होने वाला पानी गंभीर रूप से दूषित हो गया।
पूरी पाइपलाइन की जांच, उबालकर पानी पीने की सलाह
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरे क्षेत्र की पेयजल पाइपलाइन की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि किसी अन्य रिसाव का पता लगाया जा सके। जांच के बाद घरों में साफ पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है, लेकिन एहतियातन लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। पानी के नए नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
भविष्य के लिए SOP जारी करेगी सरकार
संजय दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर उन्होंने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया है। राज्य सरकार भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करेगी।
घर-घर सर्वे, सैकड़ों मरीजों का इलाज
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, गुरुवार को भागीरथपुरा के 1,714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 8,571 लोगों की जांच हुई। इनमें से 338 लोगों को उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।
अस्पतालों में इलाज जारी, कई मरीज ICU में
पिछले 8 दिनों में कुल 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल 201 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर है और वे ICU में इलाजरत हैं।