रूस को लेकर पश्चिमी देशों में इस समय जबरदस्त उबाल है। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) रूस को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार नजर आ रहे हैं—even अगर उन्हें रूस के सहयोगियों पर दबाव बनाना पड़े। अमेरिका में भारत और चीन पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव कानून के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में यूरोपीय संघ ने भारत की एक कंपनी पर प्रतिबंध भी लगा दिया है।
नाटो और अमेरिका की धमकी
नाटो प्रमुख और अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम दोनों ही भारत को चेतावनी दे चुके हैं। ग्राहम ने खुले शब्दों में कहा कि यदि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश सस्ता रूसी तेल खरीदते रहे, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर देगा।
भारत का स्पष्ट रुख: एनर्जी सिक्योरिटी सर्वोपरि
इन तमाम धमकियों के बावजूद भारत अपने स्टैंड पर कायम है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, “भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए जो भी आवश्यक होगा, हम जरूर करेंगे।”
दोहरे मापदंडों पर सवाल
मिसरी ने यूरोपीय देशों से अपील की कि वे ऊर्जा संबंधी प्रतिबंधों पर संतुलित और स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाएं। उन्होंने कहा, “ऊर्जा के मसलों पर दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए। जब पूरा विश्व ऐसे ही संकटों से जूझ रहा है, तब केवल कुछ देशों को ही निशाना बनाना उचित नहीं।”
वाडिनार रिफाइनरी पर EU का प्रतिबंध
गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी पर प्रतिबंध को लेकर मिसरी ने कहा कि भारत EU के इस कदम को समझता है, लेकिन इसे लेकर संतुलन की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच आगामी बैठक में यह मुद्दा चर्चा में आ सकता है।